❓ Question Answer

Chapter 23 - सामाजिक एवं राजनीतिक जीवन : लड़के और लड़कियों के रूप में बड़ा होना

Q. बड़ा होना किसे कहते हैं?
Ans. बड़ा होना वह प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति के शरीर, सोच, भावनाओं और व्यवहार में उम्र के साथ बदलाव आते हैं।
Q. किशोरावस्था क्या है?
Ans. किशोरावस्था बचपन से वयस्कता की ओर बढ़ने की अवस्था है, जिसमें शारीरिक और मानसिक बदलाव होते हैं।
Q. लड़के और लड़कियों के विकास में क्या समानता है?
Ans. दोनों का शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक विकास होता है तथा दोनों को समान अवसर और सम्मान मिलना चाहिए।
Q. लिंग और जेंडर में क्या अंतर है?
Ans. जैविक लिंग शारीरिक विशेषताओं से संबंधित है, जबकि जेंडर समाज से जुड़ी भूमिकाओं, अपेक्षाओं और व्यवहारों को दर्शाता है।
Q. लैंगिक रूढ़िवादिता क्या है?
Ans. लड़के या लड़कियों के बारे में बनी ऐसी सामान्य धारणाएँ, जो सभी व्यक्तियों पर समान रूप से लागू मान ली जाती हैं, लैंगिक रूढ़िवादिता कहलाती हैं।
Q. लड़कों और लड़कियों को समान अवसर क्यों मिलने चाहिए?
Ans. समान अवसर मिलने से सभी अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार शिक्षा, खेल तथा रोजगार में आगे बढ़ सकते हैं।
Q. घरेलू कामों को केवल महिलाओं का काम मानना गलत क्यों है?
Ans. घर के काम परिवार के सभी सदस्यों की साझा जिम्मेदारी हैं और इन्हें लिंग के आधार पर बाँटना उचित नहीं है।
Q. समाज बच्चों के व्यवहार को कैसे प्रभावित करता है?
Ans. परिवार, विद्यालय, मित्र, मीडिया और सामाजिक परंपराएँ बच्चों की सोच, रुचियों और व्यवहार को प्रभावित करती हैं।
Q. लैंगिक भेदभाव क्या है?
Ans. किसी व्यक्ति के साथ उसके लिंग के कारण असमान व्यवहार करना लैंगिक भेदभाव कहलाता है।
Q. समानता का क्या अर्थ है?
Ans. समानता का अर्थ सभी व्यक्तियों को समान सम्मान, अधिकार और अवसर देना है।
Q. लड़के और लड़कियाँ कौन-कौन से खेल खेल सकते हैं?
Ans. लड़के और लड़कियाँ अपनी रुचि और क्षमता के अनुसार किसी भी खेल में भाग ले सकते हैं।
Q. शिक्षा लैंगिक समानता में कैसे मदद करती है?
Ans. शिक्षा रूढ़िवादी धारणाओं को चुनौती देती है और लोगों को समान अधिकारों तथा अवसरों के प्रति जागरूक बनाती है।
Q. परिवार में काम का बँटवारा कैसा होना चाहिए?
Ans. काम का बँटवारा रुचि, समय और क्षमता के अनुसार सहयोगपूर्वक होना चाहिए, न कि केवल लिंग के आधार पर।
Q. मीडिया लैंगिक भूमिकाओं को कैसे प्रभावित करता है?
Ans. फिल्में, विज्ञापन और अन्य मीडिया लड़के-लड़कियों की भूमिकाओं के बारे में धारणाएँ बना सकते हैं या उन्हें चुनौती दे सकते हैं।
Q. लड़कियों को खेल और शिक्षा में प्रोत्साहित करना क्यों जरूरी है?
Ans. इससे उनका आत्मविश्वास बढ़ता है और उन्हें अपनी क्षमता विकसित करने के समान अवसर मिलते हैं।
Q. समान अधिकारों का क्या महत्व है?
Ans. समान अधिकार सभी व्यक्तियों की गरिमा की रक्षा करते हैं और उन्हें भेदभाव के बिना आगे बढ़ने में सहायता देते हैं।
Q. बच्चों की रुचियों का सम्मान क्यों करना चाहिए?
Ans. हर बच्चे की रुचि अलग हो सकती है। उसका सम्मान करने से आत्मविश्वास और स्वतंत्र सोच विकसित होती है।
Q. लैंगिक रूढ़ियों को कैसे कम किया जा सकता है?
Ans. समान शिक्षा, जागरूकता, साझा घरेलू जिम्मेदारियों और सभी को समान अवसर देकर लैंगिक रूढ़ियों को कम किया जा सकता है।
Q. विद्यालय लैंगिक समानता को कैसे बढ़ावा दे सकता है?
Ans. विद्यालय सभी विद्यार्थियों को समान अवसर देकर, भेदभाव रोककर और खेल तथा गतिविधियों में समान भागीदारी सुनिश्चित करके समानता बढ़ा सकता है।
Q. हम अपने दैनिक जीवन में समानता कैसे अपना सकते हैं?
Ans. हम सभी का सम्मान करके, घरेलू काम बाँटकर, भेदभाव से बचकर और सभी को समान अवसर देकर समानता अपना सकते हैं।

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