Q. खगोल विज्ञान क्या है और आधुनिक विज्ञान में इसका क्या महत्व है?
Ans. खगोल विज्ञान में ग्रहों, तारों, आकाशगंगाओं, ब्लैक होल और ब्रह्मांड की उत्पत्ति तथा विकास का अध्ययन किया जाता है। आधुनिक खगोल विज्ञान से ब्रह्मांड की संरचना, तारों के जीवन चक्र और ग्रहों के निर्माण को समझने में सहायता मिलती है।
Q. प्रकाश-वर्ष क्या है और इसे दूरी की इकाई क्यों माना जाता है?
Ans. प्रकाश-वर्ष वह दूरी है जिसे प्रकाश निर्वात में एक वर्ष में तय करता है। यह लगभग 9.46 ट्रिलियन किलोमीटर के बराबर है। इसका उपयोग पृथ्वी से बहुत दूर स्थित तारों और आकाशगंगाओं की दूरी बताने के लिए किया जाता है।
Q. सौरमंडल का निर्माण कैसे हुआ माना जाता है?
Ans. वैज्ञानिकों के अनुसार सौरमंडल का निर्माण लगभग 4.6 अरब वर्ष पहले गैस और धूल के एक विशाल बादल से हुआ। गुरुत्वाकर्षण के कारण यह बादल सिकुड़ा, केंद्र में सूर्य बना और उसके चारों ओर बची सामग्री से ग्रह, उपग्रह तथा अन्य पिंड बने।
Q. आंतरिक और बाहरी ग्रहों में क्या अंतर है?
Ans. बुध, शुक्र, पृथ्वी और मंगल आंतरिक या स्थलीय ग्रह हैं। इनमें ठोस चट्टानी सतह होती है। बृहस्पति और शनि गैस दानव हैं, जबकि अरुण और वरुण को सामान्यतः हिम दानव कहा जाता है। बाहरी ग्रह सूर्य से अधिक दूर हैं और उनके आसपास छल्ले तथा अनेक उपग्रह पाए जाते हैं।
Q. ग्रह सूर्य के चारों ओर कक्षा में क्यों घूमते रहते हैं?
Ans. सूर्य का गुरुत्वाकर्षण ग्रहों को अपनी ओर खींचता है, जबकि ग्रहों का आगे बढ़ने वाला वेग उन्हें सीधे सूर्य में गिरने से रोकता है। इन दोनों के संयुक्त प्रभाव से ग्रह सूर्य के चारों ओर कक्षाओं में घूमते हैं।
Q. घूर्णन और परिक्रमण में क्या अंतर है?
Ans. घूर्णन का अर्थ किसी पिंड का अपनी धुरी पर घूमना है। पृथ्वी के घूर्णन से दिन और रात होते हैं। परिक्रमण का अर्थ किसी दूसरे पिंड के चारों ओर घूमना है। पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर परिक्रमा और उसकी धुरी के झुकाव के कारण ऋतुओं का चक्र बनता है।
Q. ऋतुओं के बदलने का मुख्य कारण क्या है?
Ans. पृथ्वी की धुरी लगभग 23.5 डिग्री झुकी हुई है। पृथ्वी की सूर्य के चारों ओर परिक्रमा के दौरान अलग-अलग गोलार्धों को सूर्य का प्रकाश अलग कोणों और अवधि तक मिलता है। इसी कारण ऋतुएँ बदलती हैं, न कि मुख्यतः सूर्य से दूरी बदलने के कारण।
Q. चंद्रमा की कलाएँ क्यों दिखाई देती हैं?
Ans. चंद्रमा सूर्य के प्रकाश को परावर्तित करता है। पृथ्वी के चारों ओर उसकी परिक्रमा के दौरान हमें उसके प्रकाशित भाग का अलग-अलग हिस्सा दिखाई देता है। इसी कारण अमावस्या, अर्धचंद्र और पूर्णिमा जैसी कलाएँ दिखाई देती हैं।
Q. सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण में क्या अंतर है?
Ans. सूर्य ग्रहण तब होता है जब चंद्रमा सूर्य और पृथ्वी के बीच आकर सूर्य के प्रकाश को कुछ या पूरी तरह ढक देता है। चंद्र ग्रहण तब होता है जब पृथ्वी सूर्य और चंद्रमा के बीच आ जाती है और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है।
Q. तारे अपना प्रकाश और ऊर्जा कैसे उत्पन्न करते हैं?
Ans. तारों के केंद्र में अत्यधिक तापमान और दबाव के कारण नाभिकीय संलयन होता है। सूर्य जैसे तारों में हाइड्रोजन के नाभिक मिलकर हीलियम बनाते हैं और ऊर्जा निकलती है। यही ऊर्जा प्रकाश तथा ऊष्मा के रूप में बाहर आती है।
Q. तारों का रंग उनके बारे में क्या जानकारी देता है?
Ans. तारों का रंग उनके सतही तापमान का संकेत देता है। सामान्यतः नीले तारे अधिक गर्म, सफेद तारे उनसे कम गर्म और लाल तारे अपेक्षाकृत ठंडे होते हैं। तारों के तापमान, चमक और स्पेक्ट्रम का अध्ययन उनके गुणों को समझने में मदद करता है।
Q. सुपरनोवा क्या है और इसका ब्रह्मांड में क्या महत्व है?
Ans. सुपरनोवा किसी तारे के जीवन के अंतिम चरण में होने वाला अत्यंत शक्तिशाली विस्फोट है। यह कुछ भारी तत्वों को अंतरिक्ष में फैलाता है और आसपास के गैस-बादलों को प्रभावित कर सकता है। ऐसे विस्फोट ब्रह्मांड में तत्वों के वितरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
Q. ब्लैक होल क्या है और उसका गुरुत्वाकर्षण इतना प्रबल क्यों होता है?
Ans. ब्लैक होल अंतरिक्ष का ऐसा क्षेत्र है जहाँ पदार्थ बहुत छोटे क्षेत्र में अत्यधिक सघन हो जाता है। उसके घटना क्षितिज के भीतर से प्रकाश भी बाहर नहीं निकल सकता। ब्लैक होल का अध्ययन आसपास के पदार्थ, तारों की गति और उनसे निकलने वाले विकिरण के माध्यम से किया जाता है।
Q. क्षुद्रग्रह, धूमकेतु और उल्कापिंड में क्या अंतर है?
Ans. क्षुद्रग्रह मुख्यतः चट्टानी या धात्विक पिंड होते हैं जो सूर्य की परिक्रमा करते हैं। धूमकेतुओं में बर्फ, धूल और चट्टानी पदार्थ होते हैं तथा सूर्य के पास आने पर वे गैस और धूल की पूँछ बना सकते हैं। अंतरिक्ष से पृथ्वी के वातावरण में प्रवेश करने वाले पिंड को उल्का कहा जाता है और सतह तक पहुँचने वाले बचे हुए टुकड़े को उल्कापिंड कहते हैं।
Q. कृत्रिम उपग्रह पृथ्वी पर किन कार्यों में सहायता करते हैं?
Ans. कृत्रिम उपग्रह संचार, मौसम पूर्वानुमान, नेविगेशन, पृथ्वी अवलोकन, कृषि निगरानी और आपदा प्रबंधन में उपयोगी हैं। अलग-अलग प्रकार की कक्षाओं और उपकरणों वाले उपग्रह अलग उद्देश्यों के लिए बनाए जाते हैं।
Q. भूस्थिर उपग्रह क्या है और संचार में इसका क्या लाभ है?
Ans. भूस्थिर उपग्रह पृथ्वी के भूमध्यरेखीय तल में लगभग 35,786 किलोमीटर की ऊँचाई पर पश्चिम से पूर्व दिशा में पृथ्वी के घूर्णन के समान अवधि में परिक्रमा करता है। वह पृथ्वी की सतह के एक ही क्षेत्र के ऊपर स्थिर दिखाई देता है, इसलिए निरंतर संचार और प्रसारण में उपयोगी होता है।
Q. अंतरिक्ष दूरबीनें पृथ्वी पर स्थित दूरबीनों से कैसे अलग होती हैं?
Ans. अंतरिक्ष दूरबीनें पृथ्वी के वायुमंडल के बाहर या उसके प्रभाव से ऊपर काम करती हैं। इससे वायुमंडलीय विकृति और कुछ तरंगदैर्ध्यों के अवशोषण की समस्या कम होती है। हालांकि उनकी मरम्मत, लागत और संचालन अधिक कठिन हो सकते हैं।
Q. भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में चंद्रयान मिशनों का क्या महत्व है?
Ans. चंद्रयान मिशनों ने चंद्रमा की सतह, खनिजों और ध्रुवीय क्षेत्रों के अध्ययन में योगदान दिया है। चंद्रयान-3 ने 2023 में चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र के निकट सफल सॉफ्ट लैंडिंग की। ऐसे अभियान भारत की वैज्ञानिक और तकनीकी क्षमता को आगे बढ़ाते हैं।
Q. अंतरिक्ष मलबा क्या है और यह अंतरिक्ष अभियानों के लिए खतरा क्यों है?
Ans. अंतरिक्ष मलबे में निष्क्रिय उपग्रह, रॉकेट के छोड़े गए हिस्से और टक्कर से बने टुकड़े शामिल हैं। ये बहुत तेज गति से घूमते हैं और सक्रिय उपग्रहों या अंतरिक्ष यानों को नुकसान पहुँचा सकते हैं। मलबे की निगरानी, टक्कर से बचने की योजना और जिम्मेदार मिशन डिजाइन इसके जोखिम को कम करने में मदद करते हैं।
Q. अंतरिक्ष अनुसंधान से पृथ्वी पर रहने वाले लोगों को क्या लाभ मिलता है?
Ans. अंतरिक्ष अनुसंधान से मौसम पूर्वानुमान, संचार, नेविगेशन, आपदा चेतावनी, पृथ्वी के संसाधनों की निगरानी और वैज्ञानिक ज्ञान में सुधार होता है। इसके साथ ही उन्नत सामग्री, सेंसर और डेटा विश्लेषण जैसी तकनीकों का विकास भी संभव होता है।