❓ Question Answer

Chapter 15 - पर्यावरण एवं जैव विविधता

Q. पर्यावरण और पारिस्थितिकी तंत्र में क्या अंतर है?
Ans. पर्यावरण में जीवों को प्रभावित करने वाले सभी जैविक और अजैविक घटक शामिल होते हैं। पारिस्थितिकी तंत्र एक ऐसी कार्यात्मक इकाई है जिसमें जीवधारी अपने भौतिक पर्यावरण के साथ परस्पर क्रिया करते हैं तथा ऊर्जा और पोषक तत्वों का आदान-प्रदान होता है।
Q. जैव विविधता क्या है और इसके प्रमुख स्तर कौन-कौन से हैं?
Ans. जैव विविधता पृथ्वी पर जीवन के विभिन्न रूपों की विविधता है। इसके तीन प्रमुख स्तर आनुवंशिक विविधता, प्रजातीय विविधता और पारिस्थितिकी तंत्र विविधता हैं। ये स्तर जीवों की अनुकूलन क्षमता और पारिस्थितिक स्थिरता में योगदान देते हैं।
Q. खाद्य शृंखला और खाद्य जाल में क्या अंतर है?
Ans. खाद्य शृंखला जीवों के बीच भोजन और ऊर्जा के स्थानांतरण का एक क्रमबद्ध मार्ग है। खाद्य जाल अनेक परस्पर जुड़ी खाद्य शृंखलाओं का समूह है। खाद्य जाल किसी पारिस्थितिकी तंत्र में भोजन संबंधों की अधिक वास्तविक तस्वीर प्रस्तुत करता है।
Q. पारिस्थितिकी तंत्र में उत्पादकों की क्या भूमिका होती है?
Ans. हरे पौधे और कुछ सूक्ष्मजीव सूर्य के प्रकाश या अन्य ऊर्जा स्रोतों का उपयोग करके कार्बनिक पदार्थ बनाते हैं। ये उत्पादक खाद्य जाल के आधार पर ऊर्जा उपलब्ध कराते हैं और अनेक जीवों के लिए भोजन का स्रोत बनते हैं।
Q. खाद्य शृंखला में ऊर्जा का प्रवाह एक दिशा में क्यों होता है?
Ans. ऊर्जा उत्पादकों से उपभोक्ताओं और फिर अपघटकों तक विभिन्न मार्गों से पहुँचती है। प्रत्येक पोषण स्तर पर ऊर्जा का बड़ा भाग श्वसन, गतिविधियों और ऊष्मा के रूप में खर्च या नष्ट हो जाता है। इसलिए ऊर्जा का प्रवाह चक्रीय नहीं होता, जबकि पदार्थों का पुनर्चक्रण हो सकता है।
Q. जैव आवर्धन क्या है और यह शीर्ष उपभोक्ताओं को कैसे प्रभावित करता है?
Ans. जैव आवर्धन में कुछ स्थायी और वसा में जमा होने वाले प्रदूषकों की सांद्रता खाद्य शृंखला के ऊँचे पोषण स्तरों पर बढ़ सकती है। इससे शीर्ष उपभोक्ताओं, जैसे शिकारी पक्षियों और बड़ी मछलियों, के स्वास्थ्य, प्रजनन और अस्तित्व पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है।
Q. वनों की कटाई से स्थानीय जलवायु और जल चक्र पर क्या प्रभाव पड़ता है?
Ans. वनों की कटाई से वाष्पोत्सर्जन घट सकता है, मिट्टी का कटाव बढ़ सकता है और जल के भूमि में समाने की क्षमता कम हो सकती है। इससे स्थानीय तापमान, वर्षा के प्रतिरूप, बाढ़ और सूखे का जोखिम प्रभावित हो सकता है।
Q. जलवायु परिवर्तन और वैश्विक तापन में क्या अंतर है?
Ans. वैश्विक तापन पृथ्वी के औसत तापमान में दीर्घकालीन वृद्धि को कहते हैं। जलवायु परिवर्तन इससे व्यापक अवधारणा है, जिसमें तापमान के साथ वर्षा, चरम मौसमी घटनाओं, समुद्र के स्तर और अन्य जलवायवीय प्रतिरूपों में बदलाव भी शामिल हैं।
Q. ग्रीनहाउस प्रभाव पृथ्वी के तापमान को किस प्रकार प्रभावित करता है?
Ans. वायुमंडल में कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन और अन्य ग्रीनहाउस गैसें पृथ्वी से निकलने वाले अवरक्त विकिरण का कुछ भाग अवशोषित करके पुनः उत्सर्जित करती हैं। प्राकृतिक ग्रीनहाउस प्रभाव जीवन के लिए आवश्यक है, लेकिन मानवीय गतिविधियों से इसका बढ़ना वैश्विक तापन को बढ़ाता है।
Q. ओजोन परत और ग्रीनहाउस प्रभाव में क्या अंतर है?
Ans. समताप मंडल की ओजोन परत सूर्य की हानिकारक पराबैंगनी किरणों का बड़ा भाग अवशोषित करती है। ग्रीनहाउस प्रभाव मुख्य रूप से पृथ्वी की ऊष्मा के विकिरण से संबंधित है। दोनों अलग प्रक्रियाएँ हैं, यद्यपि कुछ रसायन दोनों समस्याओं को प्रभावित कर सकते हैं।
Q. यूट्रोफिकेशन क्या है और इससे जलीय जीवन को खतरा क्यों होता है?
Ans. जब जलाशयों में नाइट्रोजन और फॉस्फोरस जैसे पोषक तत्व अत्यधिक बढ़ जाते हैं, तो शैवाल की असामान्य वृद्धि हो सकती है। इनके विघटन से घुलित ऑक्सीजन घट सकती है, जिससे मछलियों और अन्य जलीय जीवों को नुकसान पहुँचता है।
Q. जैविक और अजैविक घटकों के बीच परस्पर निर्भरता को उदाहरण सहित समझाइए।
Ans. पौधे सूर्य के प्रकाश, जल, कार्बन डाइऑक्साइड और मिट्टी के खनिजों का उपयोग करके भोजन बनाते हैं। शाकाहारी जीव पौधों पर निर्भर होते हैं और शिकारी शाकाहारियों सहित अन्य जीवों पर निर्भर हो सकते हैं। इस प्रकार जीवित और निर्जीव घटक मिलकर पारिस्थितिकी तंत्र चलाते हैं।
Q. जैव विविधता का संरक्षण खाद्य सुरक्षा और मानव स्वास्थ्य के लिए क्यों आवश्यक है?
Ans. जैव विविधता परागण, मिट्टी की उर्वरता, जल शुद्धिकरण और कीट नियंत्रण जैसी पारिस्थितिकी सेवाओं में योगदान देती है। विविध फसलें और आनुवंशिक संसाधन रोगों तथा जलवायु परिवर्तन के प्रति कृषि की सहनशीलता बढ़ा सकते हैं। अनेक औषधीय संसाधन भी जैव विविधता से प्राप्त होते हैं।
Q. इन-सीटू और एक्स-सीटू संरक्षण में क्या अंतर है?
Ans. इन-सीटू संरक्षण में प्रजातियों को उनके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रखा जाता है, जैसे राष्ट्रीय उद्यान और वन्यजीव अभयारण्य। एक्स-सीटू संरक्षण में प्राकृतिक आवास से बाहर संरक्षण किया जाता है, जैसे वनस्पति उद्यान, बीज बैंक, चिड़ियाघर और जीन बैंक।
Q. आक्रामक विदेशी प्रजातियाँ स्थानीय जैव विविधता को कैसे नुकसान पहुँचा सकती हैं?
Ans. कुछ बाहरी प्रजातियाँ नए क्षेत्र में तेजी से फैलकर स्थानीय प्रजातियों से भोजन और स्थान के लिए प्रतिस्पर्धा करती हैं। वे रोग फैला सकती हैं, आवास बदल सकती हैं और खाद्य जाल को प्रभावित कर सकती हैं। हालांकि हर विदेशी प्रजाति आक्रामक नहीं होती।
Q. मृदा अपरदन के प्रमुख कारण और उसके पर्यावरणीय परिणाम बताइए।
Ans. वनों की कटाई, अत्यधिक चराई, अनुचित खेती, ढलानों पर असावधानीपूर्वक निर्माण और तेज बहाव मृदा अपरदन बढ़ा सकते हैं। इससे उपजाऊ मिट्टी नष्ट होती है, कृषि उत्पादकता घटती है और नदियों तथा जलाशयों में गाद जमा हो सकती है।
Q. नवीकरणीय और अनवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों में अंतर स्पष्ट कीजिए।
Ans. नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत प्राकृतिक प्रक्रियाओं से अपेक्षाकृत कम समय में पुनः उपलब्ध हो सकते हैं, जैसे सौर, पवन और जल ऊर्जा। कोयला, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस जैसे अनवीकरणीय स्रोत सीमित भंडार हैं और इनके बनने में अत्यधिक लंबा समय लगता है।
Q. पर्यावरणीय प्रभाव आकलन (EIA) का उद्देश्य क्या है?
Ans. पर्यावरणीय प्रभाव आकलन किसी प्रस्तावित परियोजना के संभावित पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों की पहचान तथा मूल्यांकन करने की प्रक्रिया है। इससे निर्णय लेने वालों को प्रदूषण नियंत्रण, वैकल्पिक स्थान, जोखिम कम करने और पर्यावरण संरक्षण के उपाय तय करने में मदद मिलती है।
Q. सतत विकास क्या है और इसमें वर्तमान तथा भविष्य की पीढ़ियों के हित कैसे जुड़े हैं?
Ans. सतत विकास ऐसा विकास है जो वर्तमान पीढ़ी की आवश्यकताओं को पूरा करते हुए भविष्य की पीढ़ियों की अपनी आवश्यकताएँ पूरी करने की क्षमता से समझौता नहीं करता। इसमें आर्थिक प्रगति, सामाजिक समानता और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन जरूरी है।
Q. स्थानीय समुदाय जैव विविधता संरक्षण में किस प्रकार योगदान दे सकते हैं?
Ans. स्थानीय समुदाय देशज प्रजातियों का संरक्षण, जल स्रोतों की रक्षा, वन संसाधनों का जिम्मेदार उपयोग, अवैध शिकार की सूचना, कचरे में कमी और पारंपरिक पर्यावरणीय ज्ञान के संरक्षण में योगदान दे सकते हैं। स्थानीय लोगों की भागीदारी संरक्षण को अधिक प्रभावी और दीर्घकालीन बना सकती है।

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