❓ Question Answer

Chapter 9 - साखियाँ एवं सबद

Q. साखियाँ एवं सबद के रचयिता कौन हैं?
Ans. साखियाँ एवं सबद के रचयिता संत कबीरदास हैं।
Q. साखी शब्द का क्या अर्थ है?
Ans. साखी का अर्थ ऐसी अनुभूतिपरक शिक्षा या कथन से है जो जीवन के सत्य को समझने में सहायता करे।
Q. सबद की प्रमुख विशेषता क्या है?
Ans. सबद में आध्यात्मिक अनुभूति, आत्मज्ञान और जीवन संबंधी विचारों को काव्यात्मक रूप में व्यक्त किया जाता है।
Q. कबीरदास ने सच्चे ज्ञान को किससे जोड़ा है?
Ans. कबीरदास ने सच्चे ज्ञान को आत्मचिंतन, अनुभव और आचरण की शुद्धता से जोड़ा है।
Q. कबीरदास बाहरी आडंबरों का विरोध क्यों करते हैं?
Ans. वे मानते हैं कि केवल बाहरी दिखावा मनुष्य को सच्चा ज्ञानी या आध्यात्मिक नहीं बनाता। वास्तविक परिवर्तन मन और व्यवहार में होना चाहिए।
Q. कबीरदास की वाणी में गुरु का क्या महत्व है?
Ans. गुरु व्यक्ति को अज्ञान से ज्ञान की ओर ले जाने और सत्य को समझने का मार्ग दिखाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
Q. आत्मज्ञान का क्या अर्थ है?
Ans. आत्मज्ञान का अर्थ अपने विचारों, कमजोरियों, व्यवहार और वास्तविक स्वरूप को समझना है।
Q. कबीरदास ने अहंकार को अनुचित क्यों माना है?
Ans. अहंकार व्यक्ति को अपनी गलतियाँ देखने और दूसरों से सीखने से रोकता है। इसलिए विनम्रता ज्ञान और आत्मविकास के लिए आवश्यक है।
Q. कबीरदास की भाषा की प्रमुख विशेषताएँ क्या हैं?
Ans. उनकी भाषा सरल, जनसामान्य के निकट, प्रभावशाली और लोकभाषाओं के मिश्रण से युक्त है।
Q. कबीरदास के काव्य में प्रतीकों का क्या महत्व है?
Ans. प्रतीकों के माध्यम से वे कठिन आध्यात्मिक और नैतिक विचारों को सरल तथा प्रभावशाली ढंग से व्यक्त करते हैं।
Q. कबीरदास मनुष्य को आत्मचिंतन के लिए क्यों प्रेरित करते हैं?
Ans. आत्मचिंतन से व्यक्ति अपनी कमियों को पहचान सकता है और अपने आचरण में सुधार कर सकता है।
Q. कबीरदास की वाणी में सामाजिक समानता का संदेश कैसे मिलता है?
Ans. वे मनुष्य के मूल्य को बाहरी पहचान के बजाय उसके ज्ञान, आचरण और मानवीय गुणों से जोड़ते हैं।
Q. सच्चे ज्ञान और पुस्तकीय जानकारी में क्या अंतर है?
Ans. पुस्तकीय जानकारी तथ्यों का ज्ञान देती है, जबकि सच्चा ज्ञान समझ, अनुभव और उचित आचरण में दिखाई देता है।
Q. कबीरदास के अनुसार मधुर वाणी का क्या महत्व है?
Ans. मधुर और विवेकपूर्ण वाणी दूसरों को सम्मान देती है, विवाद कम करती है और आपसी संबंधों को बेहतर बनाती है।
Q. धार्मिक आडंबर और सच्ची भक्ति में क्या अंतर है?
Ans. धार्मिक आडंबर बाहरी प्रदर्शन पर केंद्रित होता है, जबकि सच्ची भक्ति आंतरिक श्रद्धा, सदाचार और आत्मिक परिवर्तन से जुड़ी होती है।
Q. कबीरदास की रचनाएँ आज भी प्रासंगिक क्यों हैं?
Ans. उनकी रचनाएँ अहंकार, भेदभाव, दिखावे और असत्य जैसी समस्याओं पर विचार करने तथा बेहतर जीवन जीने की प्रेरणा देती हैं।
Q. कबीरदास ने मनुष्य के आचरण को महत्व क्यों दिया है?
Ans. आचरण से व्यक्ति के वास्तविक विचार और मूल्य प्रकट होते हैं। केवल कथन या बाहरी पहचान से चरित्र सिद्ध नहीं होता।
Q. कबीरदास के काव्य में अनुभव का क्या स्थान है?
Ans. अनुभव व्यक्ति को सत्य को गहराई से समझने और ज्ञान को जीवन में लागू करने में सहायता करता है।
Q. साखियाँ एवं सबद से विद्यार्थी क्या नैतिक शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं?
Ans. विद्यार्थी विनम्रता, आत्मचिंतन, सत्यनिष्ठा, समानता और विवेकपूर्ण व्यवहार की शिक्षा प्राप्त कर सकते हैं।
Q. साखियाँ एवं सबद का केंद्रीय संदेश क्या है?
Ans. इस पाठ का केंद्रीय संदेश है कि सच्चा ज्ञान आंतरिक शुद्धता, आत्मचिंतन, विनम्रता और सदाचार से प्राप्त होता है।

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