Q. नाज़ीवाद क्या था?
Ans. नाज़ीवाद जर्मनी में एडॉल्फ हिटलर और उसकी नाज़ी पार्टी से जुड़ी एक तानाशाही, नस्लवादी और अति-राष्ट्रवादी विचारधारा थी। इसमें लोकतंत्र का विरोध, आर्य नस्ल की श्रेष्ठता का दावा, यहूदी-विरोध और सैन्य विस्तार पर जोर दिया गया।
Q. एडॉल्फ हिटलर कौन था?
Ans. एडॉल्फ हिटलर जर्मनी की नाज़ी पार्टी का नेता था। वह जनवरी 1933 में जर्मनी का चांसलर बना और बाद में लोकतांत्रिक संस्थाओं को समाप्त करके तानाशाही शासन स्थापित किया। उसके शासन ने द्वितीय विश्व युद्ध और यहूदियों के नरसंहार सहित अनेक भयावह अपराधों को जन्म दिया।
Q. वाइमर गणराज्य क्या था?
Ans. प्रथम विश्व युद्ध में जर्मनी की हार और 1918 में राजशाही के अंत के बाद स्थापित लोकतांत्रिक शासन को वाइमर गणराज्य कहा जाता है। इसका संविधान 1919 में वाइमर शहर में तैयार किया गया। इसे राजनीतिक अस्थिरता, आर्थिक संकट और चरमपंथी आंदोलनों का सामना करना पड़ा।
Q. वर्साय की संधि क्या थी?
Ans. 1919 में प्रथम विश्व युद्ध के बाद जर्मनी और मित्र राष्ट्रों के बीच हुई संधि को वर्साय की संधि कहा जाता है। इसमें जर्मनी पर युद्ध की जिम्मेदारी स्वीकार करने, क्षतिपूर्ति देने, सैन्य शक्ति सीमित करने और कुछ क्षेत्र खोने जैसी शर्तें लगाई गईं। इन शर्तों से जर्मनी में व्यापक असंतोष फैला।
Q. जर्मनी में नाज़ीवाद के उदय के प्रमुख कारण क्या थे?
Ans. नाज़ीवाद के उदय के प्रमुख कारणों में वर्साय की संधि से असंतोष, वाइमर गणराज्य की राजनीतिक अस्थिरता, बेरोजगारी, आर्थिक संकट, महामंदी, साम्यवाद का भय और हिटलर का प्रचार शामिल थे।
Q. 1929 की महामंदी का जर्मनी पर क्या प्रभाव पड़ा?
Ans. 1929 में शुरू हुई महामंदी से जर्मनी की अर्थव्यवस्था बुरी तरह प्रभावित हुई। उद्योगों का उत्पादन घटा, व्यवसाय बंद हुए और बेरोजगारी तेजी से बढ़ी। लोगों का लोकतांत्रिक सरकार पर विश्वास कमजोर हुआ और नाज़ी पार्टी को समर्थन बढ़ाने का अवसर मिला।
Q. हिटलर जर्मनी का चांसलर कब बना?
Ans. 30 जनवरी 1933 को राष्ट्रपति पॉल वॉन हिंडनबर्ग ने एडॉल्फ हिटलर को जर्मनी का चांसलर नियुक्त किया। सत्ता में आने के बाद हिटलर ने धीरे-धीरे लोकतांत्रिक व्यवस्था को नष्ट कर तानाशाही स्थापित की।
Q. राइखस्टाग अग्निकांड क्या था?
Ans. 27 फरवरी 1933 को जर्मन संसद भवन, राइखस्टाग में आग लगी। हिटलर की सरकार ने इस घटना का उपयोग राजनीतिक विरोधियों, विशेषकर कम्युनिस्टों, के विरुद्ध दमन बढ़ाने और नागरिक स्वतंत्रताओं को सीमित करने के लिए किया।
Q. सक्षमकारी अधिनियम (Enabling Act) 1933 का क्या महत्व था?
Ans. मार्च 1933 में पारित सक्षमकारी अधिनियम ने हिटलर की सरकार को संसद की सामान्य प्रक्रिया के बाहर कानून बनाने की व्यापक शक्ति दी। इससे लोकतांत्रिक नियंत्रण कमजोर हुआ और नाज़ी तानाशाही स्थापित करने का मार्ग खुला।
Q. नाज़ी विचारधारा में नस्लवाद का क्या स्थान था?
Ans. नाज़ी विचारधारा झूठे नस्लीय पदानुक्रम पर आधारित थी। नाज़ियों ने तथाकथित आर्य नस्ल को श्रेष्ठ बताया और यहूदियों, रोमानी लोगों तथा अन्य समूहों को नीचा दिखाया। इन विचारों का उपयोग भेदभाव, उत्पीड़न और सामूहिक हत्या को उचित ठहराने के लिए किया गया।
Q. नाज़ियों ने यहूदियों के साथ कैसा व्यवहार किया?
Ans. नाज़ी शासन ने यहूदियों के नागरिक अधिकार छीने, उन्हें नौकरियों और सार्वजनिक जीवन से बाहर किया, उनकी संपत्ति जब्त की और उन्हें यहूदी-विरोधी कानूनों के अधीन किया। बाद में लाखों यहूदियों की व्यवस्थित हत्या की गई, जिसे होलोकॉस्ट कहा जाता है।
Q. नूर्नबर्ग कानून क्या थे?
Ans. 1935 में लागू नूर्नबर्ग कानूनों ने जर्मनी के यहूदियों को नागरिक अधिकारों से वंचित किया और यहूदियों तथा तथाकथित जर्मन रक्त वाले लोगों के बीच विवाह और संबंधों पर प्रतिबंध लगाए। ये नाज़ी नस्लवादी नीति का प्रमुख हिस्सा थे।
Q. होलोकॉस्ट क्या था?
Ans. होलोकॉस्ट द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान नाज़ी जर्मनी और उसके सहयोगियों द्वारा लगभग 60 लाख यहूदियों की व्यवस्थित सामूहिक हत्या को कहा जाता है। इसके अतिरिक्त रोमानी लोगों, दिव्यांग व्यक्तियों, पोलिश नागरिकों, सोवियत युद्धबंदियों और अन्य समूहों को भी व्यापक उत्पीड़न और हत्या का सामना करना पड़ा।
Q. नाज़ी शासन ने युवाओं को प्रभावित करने के लिए क्या किया?
Ans. नाज़ियों ने स्कूलों की पाठ्यपुस्तकों और शिक्षण को अपनी विचारधारा के अनुसार बदला। बच्चों को नस्लवादी विचार सिखाए गए और युवाओं को नाज़ी संगठनों में शामिल होने के लिए प्रोत्साहित किया गया। लड़कों को सैन्य प्रशिक्षण और लड़कियों को नाज़ी शासन द्वारा निर्धारित पारिवारिक भूमिकाओं के लिए तैयार किया जाता था।
Q. नाज़ी शासन में महिलाओं की भूमिका को किस प्रकार परिभाषित किया गया?
Ans. नाज़ी शासन महिलाओं को मुख्यतः मातृत्व, बच्चों के पालन-पोषण और तथाकथित नस्लीय शुद्धता बनाए रखने की भूमिका में देखता था। शासन ने महिलाओं के जीवन और प्रजनन संबंधी निर्णयों पर नियंत्रण बढ़ाया तथा नस्लवादी मानदंडों के आधार पर भेदभाव किया।
Q. नाज़ियों ने प्रचार का उपयोग कैसे किया?
Ans. नाज़ियों ने रेडियो, पोस्टर, समाचार-पत्र, फिल्मों, जनसभाओं और नारों का उपयोग हिटलर की छवि मजबूत करने तथा अपनी विचारधारा फैलाने के लिए किया। प्रचार के माध्यम से यहूदी-विरोध, राष्ट्रवाद और राजनीतिक विरोधियों के प्रति घृणा को बढ़ावा दिया गया।
Q. द्वितीय विश्व युद्ध कब शुरू हुआ और जर्मनी की क्या भूमिका थी?
Ans. द्वितीय विश्व युद्ध 1 सितंबर 1939 को जर्मनी द्वारा पोलैंड पर आक्रमण करने के बाद यूरोप में शुरू हुआ। ब्रिटेन और फ्रांस ने जर्मनी के विरुद्ध युद्ध की घोषणा की। नाज़ी जर्मनी ने यूरोप के बड़े क्षेत्रों पर कब्जा किया और व्यापक हिंसा तथा विनाश किया।
Q. नाज़ी यातना शिविर क्या थे?
Ans. नाज़ी यातना शिविर वे स्थान थे जहाँ राजनीतिक विरोधियों और नाज़ियों द्वारा लक्षित अन्य लोगों को कैद किया जाता था। कई शिविरों में कैदियों को अमानवीय परिस्थितियों, जबरन श्रम, भूख, बीमारी और हत्या का सामना करना पड़ा। कुछ शिविर विशेष रूप से सामूहिक नरसंहार के लिए बनाए गए थे।
Q. जर्मनी में नाज़ी शासन का अंत कैसे हुआ?
Ans. द्वितीय विश्व युद्ध में मित्र राष्ट्रों की प्रगति के साथ नाज़ी जर्मनी पराजित हुआ। अप्रैल 1945 में हिटलर ने आत्महत्या कर ली और मई 1945 में जर्मनी ने बिना शर्त आत्मसमर्पण किया। इससे यूरोप में नाज़ी शासन का अंत हुआ।
Q. नाज़ीवाद के इतिहास से हमें क्या सीख मिलती है?
Ans. नाज़ीवाद का इतिहास बताता है कि नस्लवाद, घृणा-प्रचार, अंधराष्ट्रवाद और तानाशाही मानवाधिकारों तथा लोकतंत्र को गंभीर नुकसान पहुँचा सकते हैं। अल्पसंख्यकों की रक्षा, स्वतंत्र संस्थाएँ, ऐतिहासिक साक्ष्यों की समझ और नागरिक समानता अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।