❓ Question Answer

Chapter 6 - किसान एवं कृषक

Q. किसान एवं कृषक अध्याय का मुख्य विषय क्या है?
Ans. यह अध्याय कृषि व्यवस्था में हुए ऐतिहासिक परिवर्तनों, किसानों के जीवन, भूमि पर अधिकार, खेती की तकनीकों और औपनिवेशिक नीतियों के प्रभाव का अध्ययन करता है। इसमें इंग्लैंड, अमेरिका और भारत के उदाहरणों से समझाया गया है कि कृषि परिवर्तन ने किसानों तथा ग्रामीण समाज को कैसे प्रभावित किया।
Q. इंग्लैंड में एनक्लोजर आंदोलन क्या था?
Ans. एनक्लोजर आंदोलन के दौरान खुले खेतों और सामुदायिक भूमि को घेरकर निजी खेतों में बदला गया। बड़े भू-स्वामियों ने भूमि पर अपना नियंत्रण बढ़ाया और खेती को अधिक व्यवस्थित तथा व्यावसायिक बनाने का प्रयास किया। इससे अनेक छोटे किसानों और ग्रामीण गरीबों की सामुदायिक भूमि तक पहुँच प्रभावित हुई।
Q. इंग्लैंड में बड़े भू-स्वामी एनक्लोजर क्यों चाहते थे?
Ans. बड़े भू-स्वामी भूमि का अधिक लाभकारी उपयोग करना चाहते थे। वे फसल उत्पादन बढ़ाने, नई कृषि तकनीकें अपनाने और बाजार की माँग के अनुसार खेती करने के लिए भूमि को बड़े निजी खेतों में बदलना चाहते थे।
Q. एनक्लोजर आंदोलन का छोटे किसानों पर क्या प्रभाव पड़ा?
Ans. एनक्लोजर से अनेक छोटे किसानों की सामुदायिक भूमि पर निर्भरता कम हुई या समाप्त हो गई। कुछ किसानों को अपनी जमीन बेचनी पड़ी और कुछ ग्रामीण मजदूरी करने लगे। हालांकि इसका प्रभाव अलग-अलग क्षेत्रों और परिवारों पर अलग था।
Q. इंग्लैंड में कृषि क्रांति से क्या तात्पर्य है?
Ans. इंग्लैंड में कृषि क्रांति से आशय खेती की तकनीकों, फसल चक्र, भूमि व्यवस्था और उत्पादन पद्धतियों में हुए बड़े बदलावों से है। बेहतर उपकरणों, चयनित पशु प्रजनन और नई कृषि विधियों ने उत्पादन बढ़ाने में योगदान दिया।
Q. चार्ल्स टाउनशेंड कौन थे?
Ans. चार्ल्स टाउनशेंड अठारहवीं शताब्दी के ब्रिटिश राजनेता और बड़े भू-स्वामी थे। वे फसल चक्र और शलजम जैसी फसलों के उपयोग को बढ़ावा देने से जुड़े थे। उन्हें कभी-कभी टर्निप टाउनशेंड कहा जाता था।
Q. फसल चक्र क्या है और इसका क्या लाभ है?
Ans. फसल चक्र में एक ही खेत में अलग-अलग मौसमों या वर्षों में विभिन्न फसलें क्रम से उगाई जाती हैं। इससे मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने, पोषक तत्वों के संतुलन और कुछ कीटों तथा खरपतवारों की समस्या कम करने में सहायता मिल सकती है।
Q. अमेरिका में गेहूँ की खेती का विस्तार क्यों हुआ?
Ans. अमेरिका में कृषि भूमि का विस्तार, नई मशीनों का उपयोग, बाजार की बढ़ती माँग और परिवहन के विकास से गेहूँ की खेती बढ़ी। विशेष रूप से उन्नीसवीं और बीसवीं शताब्दी के आरंभ में बड़े खेतों पर यंत्रीकृत खेती का विकास हुआ।
Q. कृषि में मशीनों के उपयोग से क्या परिवर्तन आए?
Ans. ट्रैक्टर, सीड ड्रिल और हार्वेस्टर जैसी मशीनों ने खेत तैयार करने, बीज बोने और फसल काटने के कार्य तेज किए। इससे बड़े खेतों में उत्पादन बढ़ाने में सहायता मिली, लेकिन कुछ परिस्थितियों में मजदूरों की आवश्यकता कम हुई और किसानों की मशीनों तथा पूँजी पर निर्भरता बढ़ी।
Q. अमेरिका के ग्रेट प्लेन्स क्या हैं?
Ans. ग्रेट प्लेन्स उत्तरी अमेरिका का विशाल घास का मैदानी क्षेत्र है। यहाँ की भूमि और जलवायु ने बड़े पैमाने पर गेहूँ की खेती के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। अत्यधिक जुताई और सूखे के कारण बीसवीं शताब्दी में इस क्षेत्र के कुछ हिस्सों में गंभीर मृदा अपरदन हुआ।
Q. डस्ट बाउल क्या था?
Ans. 1930 के दशक में अमेरिका के ग्रेट प्लेन्स के कुछ हिस्सों में सूखे, तेज हवाओं और अनुचित भूमि उपयोग के कारण बड़े धूल भरे तूफान आए। इस संकट को डस्ट बाउल कहा जाता है। इससे खेतों की ऊपरी उपजाऊ मिट्टी उड़ गई और किसानों को भारी आर्थिक नुकसान हुआ।
Q. भारत में औपनिवेशिक शासन ने किसानों को कैसे प्रभावित किया?
Ans. औपनिवेशिक शासन में लगान वसूली, नकदी फसलों की खेती का दबाव और बाजार पर निर्भरता बढ़ी। कई किसानों को ऋण लेना पड़ा और फसल खराब होने या कीमतें गिरने पर उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर हुई। प्रभाव क्षेत्र, फसल और लगान व्यवस्था के अनुसार अलग-अलग था।
Q. नील की खेती भारतीय किसानों के लिए कठिन क्यों थी?
Ans. नील की खेती में किसानों को कई बार कम लाभ मिलता था और उन्हें अपनी भूमि पर खाद्यान्न की जगह नील उगाने का दबाव झेलना पड़ता था। अग्रिम ऋण और अनुबंधों के कारण अनेक किसान नील उत्पादकों या बागान मालिकों पर निर्भर हो गए।
Q. बंगाल का नील विद्रोह क्या था?
Ans. 1859–60 में बंगाल के अनेक किसानों ने नील की जबरन या शोषणकारी खेती के विरुद्ध विरोध किया। किसानों ने नील उगाने से इनकार किया और नील उत्पादकों की अन्यायपूर्ण माँगों का विरोध किया। इस आंदोलन को नील विद्रोह कहा जाता है।
Q. नील की खेती में अग्रिम भुगतान की व्यवस्था क्या थी?
Ans. नील उत्पादक किसानों को खेती शुरू करने से पहले कुछ धन अग्रिम देते थे। इसके बदले किसानों को निर्धारित भूमि पर नील उगाना और फसल तय शर्तों पर देना पड़ता था। कई मामलों में कम कीमत और कर्ज की शर्तों ने किसानों की कठिनाइयाँ बढ़ाईं।
Q. भारत में किसान खाद्यान्न के स्थान पर नकदी फसलें क्यों उगाने लगे?
Ans. औपनिवेशिक व्यापार, बाजार की माँग, निर्यात और कुछ क्षेत्रों में बागान मालिकों या व्यापारियों के दबाव ने नकदी फसलों को बढ़ावा दिया। लेकिन इससे हर जगह खाद्यान्न उत्पादन समाप्त नहीं हुआ; किसान स्थानीय परिस्थितियों और लाभ की संभावना के अनुसार निर्णय लेते थे।
Q. कृषि के व्यावसायीकरण से क्या तात्पर्य है?
Ans. कृषि के व्यावसायीकरण का अर्थ बाजार में बेचने और लाभ कमाने के उद्देश्य से फसलें उगाना है। इससे किसान बाजार की कीमतों, व्यापारियों, ऋण और परिवहन व्यवस्था पर अधिक निर्भर हो सकते हैं।
Q. किसानों पर कर्ज का बोझ क्यों बढ़ सकता है?
Ans. बीज, खाद, सिंचाई और खेती के अन्य खर्चों के लिए किसान ऋण लेते हैं। यदि फसल खराब हो जाए, कीमत गिर जाए या लगान अधिक हो, तो आय से कर्ज चुकाना कठिन हो सकता है। लगातार ऋण लेने से कर्ज का बोझ बढ़ सकता है।
Q. कृषि में तकनीकी बदलावों के लाभ और चुनौतियाँ क्या हैं?
Ans. नई मशीनें, सिंचाई, बेहतर बीज और कृषि तकनीकें उत्पादन तथा कार्यक्षमता बढ़ा सकती हैं। लेकिन इनके लिए पूँजी, प्रशिक्षण और संसाधनों की जरूरत होती है। छोटे किसानों को लागत, ऋण, भूमि की गुणवत्ता और बाजार की अनिश्चितता जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है।
Q. किसान एवं कृषक अध्याय से क्या सीख मिलती है?
Ans. यह अध्याय सिखाता है कि कृषि केवल फसल उत्पादन नहीं, बल्कि भूमि अधिकारों, श्रम, तकनीक, बाजार, पर्यावरण और सरकारी नीतियों से जुड़ी व्यवस्था है। कृषि परिवर्तन के लाभ और नुकसान किसानों के आकार, संसाधनों और सामाजिक परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग हो सकते हैं।

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