❓ Question Answer

Chapter 18 - संस्थाओं का कार्यकरण

Q. संस्थाओं का कार्यकरण क्या है?
Ans. संस्थाओं का कार्यकरण उन नियमों, प्रक्रियाओं और व्यवस्थाओं को कहते हैं जिनके माध्यम से सरकार निर्णय लेती है, कानून बनाती है और उन्हें लागू करती है। संसद, कार्यपालिका और न्यायपालिका लोकतांत्रिक शासन की प्रमुख संस्थाएँ हैं।
Q. लोकतंत्र में राजनीतिक संस्थाएँ क्यों आवश्यक हैं?
Ans. राजनीतिक संस्थाएँ शासन के कार्यों को व्यवस्थित करती हैं। वे निर्णय लेने, कानून बनाने, नीतियों को लागू करने और विवादों का समाधान करने में सहायता करती हैं। इनके माध्यम से सरकार की जवाबदेही और कानून का शासन सुनिश्चित होता है।
Q. भारत में संसद के कितने सदन हैं?
Ans. भारत की संसद के दो सदन हैं—लोकसभा और राज्यसभा। राष्ट्रपति भी संसद का एक अंग हैं। संसद कानून बनाने, सरकार पर नियंत्रण रखने और राष्ट्रीय विषयों पर चर्चा करने का कार्य करती है।
Q. लोकसभा क्या है?
Ans. लोकसभा संसद का निम्न सदन है। इसके सदस्य जनता द्वारा प्रत्यक्ष चुनाव से चुने जाते हैं। लोकसभा कानून बनाने, बजट पर विचार करने और मंत्रिपरिषद को जवाबदेह बनाने में महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
Q. राज्यसभा क्या है?
Ans. राज्यसभा संसद का उच्च सदन है। यह राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करती है। इसके अधिकांश सदस्य संबंधित विधानसभाओं के निर्वाचित सदस्यों द्वारा चुने जाते हैं। यह विधेयकों पर विचार करती है और कानून निर्माण में भाग लेती है।
Q. संसद के प्रमुख कार्य क्या हैं?
Ans. संसद कानून बनाती है, बजट और सरकारी खर्च पर विचार करती है, सरकार के कार्यों की निगरानी करती है और राष्ट्रीय महत्त्व के विषयों पर चर्चा करती है। यह जनता के प्रतिनिधियों के माध्यम से सरकार को जवाबदेह बनाती है।
Q. राजनीतिक कार्यपालिका किसे कहते हैं?
Ans. राजनीतिक कार्यपालिका में वे निर्वाचित या राजनीतिक पदाधिकारी शामिल होते हैं जो सरकारी नीतियों और निर्णयों के लिए जिम्मेदार होते हैं। भारत में प्रधानमंत्री और मंत्री राजनीतिक कार्यपालिका के प्रमुख सदस्य हैं।
Q. स्थायी कार्यपालिका क्या है?
Ans. स्थायी कार्यपालिका में सिविल सेवक और प्रशासनिक अधिकारी शामिल होते हैं। वे सरकार की नीतियों और कानूनों को लागू करने में सहायता करते हैं तथा सरकार बदलने पर भी प्रशासनिक कार्य जारी रखते हैं।
Q. प्रधानमंत्री की नियुक्ति कौन करता है?
Ans. भारत के राष्ट्रपति प्रधानमंत्री की नियुक्ति करते हैं। सामान्यतः लोकसभा में बहुमत प्राप्त दल या गठबंधन के नेता को प्रधानमंत्री नियुक्त किया जाता है।
Q. प्रधानमंत्री के प्रमुख कार्य क्या हैं?
Ans. प्रधानमंत्री मंत्रिपरिषद का नेतृत्व करते हैं, मंत्रियों के बीच कार्यों का समन्वय करते हैं, सरकारी नीतियों को दिशा देते हैं और राष्ट्रपति को मंत्रिपरिषद के निर्णयों की जानकारी देते हैं।
Q. मंत्रिपरिषद क्या है?
Ans. मंत्रिपरिषद प्रधानमंत्री के नेतृत्व में काम करने वाले मंत्रियों का समूह है। यह सरकारी नीतियों और महत्त्वपूर्ण निर्णयों के लिए सामूहिक रूप से जिम्मेदार होती है तथा लोकसभा के प्रति जवाबदेह रहती है।
Q. मंत्रिमंडल और मंत्रिपरिषद में क्या अंतर है?
Ans. मंत्रिपरिषद में सभी श्रेणियों के मंत्री शामिल होते हैं, जबकि मंत्रिमंडल वरिष्ठ मंत्रियों का छोटा और प्रमुख समूह होता है। मंत्रिमंडल महत्त्वपूर्ण सरकारी निर्णय लेने में केंद्रीय भूमिका निभाता है।
Q. भारत के राष्ट्रपति की प्रमुख भूमिका क्या है?
Ans. राष्ट्रपति भारत के संवैधानिक राष्ट्राध्यक्ष हैं। वे प्रधानमंत्री की नियुक्ति करते हैं, संसद का सत्र बुलाते हैं, विधेयकों पर संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार कार्य करते हैं और सरकार के गठन सहित अनेक औपचारिक कार्यों का निर्वहन करते हैं।
Q. संसदीय शासन प्रणाली में वास्तविक कार्यपालिका कौन होती है?
Ans. भारत की संसदीय शासन प्रणाली में प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद वास्तविक कार्यपालिका होते हैं। वे सरकारी नीतियों और प्रशासन के संचालन के लिए जिम्मेदार होते हैं, जबकि राष्ट्रपति संवैधानिक राष्ट्राध्यक्ष हैं।
Q. राजनीतिक कार्यपालिका और स्थायी कार्यपालिका में मुख्य अंतर क्या है?
Ans. राजनीतिक कार्यपालिका में राजनीतिक नेतृत्व करने वाले प्रधानमंत्री और मंत्री शामिल होते हैं, जबकि स्थायी कार्यपालिका में प्रशासनिक अधिकारी और सिविल सेवक आते हैं। राजनीतिक कार्यपालिका नीतिगत निर्णय लेती है और स्थायी कार्यपालिका उनके क्रियान्वयन में सहायता करती है।
Q. न्यायपालिका क्या है?
Ans. न्यायपालिका सरकार की वह संस्था है जो कानूनों की व्याख्या करती है, विवादों का समाधान करती है और न्याय प्रदान करती है। भारत में सर्वोच्च न्यायालय, उच्च न्यायालय और अधीनस्थ न्यायालय न्यायपालिका के प्रमुख अंग हैं।
Q. भारत में सर्वोच्च न्यायालय का क्या महत्त्व है?
Ans. सर्वोच्च न्यायालय भारत की सर्वोच्च न्यायिक संस्था है। यह संविधान की व्याख्या करता है, मौलिक अधिकारों की रक्षा करता है और कानूनों तथा सरकारी कार्यों की संवैधानिकता की न्यायिक समीक्षा कर सकता है।
Q. न्यायपालिका की स्वतंत्रता क्यों आवश्यक है?
Ans. स्वतंत्र न्यायपालिका यह सुनिश्चित करती है कि न्यायाधीश बिना अनुचित राजनीतिक दबाव के निर्णय ले सकें। इससे नागरिकों के अधिकारों की रक्षा होती है और सरकार के कार्यों की कानून तथा संविधान के आधार पर जाँच संभव होती है।
Q. न्यायिक समीक्षा क्या है?
Ans. न्यायिक समीक्षा वह शक्ति है जिसके अंतर्गत न्यायालय कानूनों और सरकारी कार्यों की संवैधानिकता की जाँच करते हैं। यदि कोई कानून या सरकारी कार्रवाई संविधान के विरुद्ध पाई जाती है, तो न्यायालय उचित संवैधानिक राहत दे सकता है।
Q. संसद और कार्यपालिका के बीच क्या संबंध है?
Ans. संसद कानून बनाती है और सरकार के कामकाज की निगरानी करती है। संसदीय प्रणाली में मंत्रिपरिषद लोकसभा के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होती है। लोकसभा में बहुमत का समर्थन खोने पर सरकार को पद छोड़ना पड़ सकता है।

🚀 Quick Access