Q. 1. विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव क्या है?
Ans. जब किसी चालक में विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो उसके चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। इस घटना को विद्युत धारा का चुंबकीय प्रभाव कहते हैं।
Q. 2. चुंबकीय क्षेत्र किसे कहते हैं?
Ans. चुंबक के चारों ओर का वह क्षेत्र, जहाँ उसके चुंबकीय बल का अनुभव किया जा सकता है, चुंबकीय क्षेत्र कहलाता है।
Q. 3. चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ क्या हैं?
Ans. चुंबकीय क्षेत्र में खींची गई काल्पनिक रेखाएँ, जिनकी किसी बिंदु पर स्पर्शरेखा चुंबकीय क्षेत्र की दिशा बताती है, चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ कहलाती हैं।
Q. 4. चुंबकीय क्षेत्र रेखाओं की दो विशेषताएँ लिखिए।
Ans. चुंबकीय क्षेत्र रेखाएँ चुंबक के बाहर उत्तर ध्रुव से दक्षिण ध्रुव की ओर जाती हैं और चुंबक के अंदर दक्षिण से उत्तर की ओर जाती हैं। ये बंद वक्र बनाती हैं तथा एक-दूसरे को नहीं काटतीं।
Q. 5. सीधे विद्युत धारावाही चालक के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र की दिशा कैसे ज्ञात करते हैं?
Ans. दाएँ हाथ के अंगूठे के नियम से दिशा ज्ञात करते हैं। दाएँ हाथ का अंगूठा धारा की दिशा में रखें, तो मुड़ी हुई उँगलियाँ चुंबकीय क्षेत्र की दिशा बताती हैं।
Q. 6. चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता किन कारकों पर निर्भर करती है?
Ans. सीधे धारावाही चालक के पास चुंबकीय क्षेत्र की तीव्रता धारा बढ़ने पर बढ़ती है और चालक से दूरी बढ़ने पर घटती है।
Q. 7. परिनालिका (Solenoid) क्या है?
Ans. एक लंबी बेलनाकार कुंडली, जिसमें विद्युतरोधी तार के अनेक पास-पास लपेटे हुए फेरे होते हैं, परिनालिका कहलाती है।
Q. 8. परिनालिका में विद्युत धारा प्रवाहित करने पर क्या होता है?
Ans. परिनालिका के चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है। इसके भीतर क्षेत्र लगभग एकसमान होता है और यह छड़ चुंबक की तरह व्यवहार कर सकती है।
Q. 9. विद्युत चुंबक क्या है?
Ans. जब किसी नरम लोहे के टुकड़े पर तार की कुंडली लपेटकर उसमें विद्युत धारा प्रवाहित की जाती है, तो बना अस्थायी चुंबक विद्युत चुंबक कहलाता है।
Q. 10. विद्युत चुंबक की शक्ति कैसे बढ़ाई जा सकती है?
Ans. कुंडली में फेरों की संख्या बढ़ाकर, उसमें प्रवाहित विद्युत धारा बढ़ाकर और उपयुक्त नरम लोहे का क्रोड उपयोग करके विद्युत चुंबक की शक्ति बढ़ाई जा सकती है।
Q. 11. चुंबकीय क्षेत्र में विद्युत धारावाही चालक पर बल कब लगता है?
Ans. जब विद्युत धारावाही चालक को चुंबकीय क्षेत्र में रखा जाता है और धारा की दिशा चुंबकीय क्षेत्र के समानांतर नहीं होती, तो चालक पर चुंबकीय बल लग सकता है।
Q. 12. फ्लेमिंग के वामहस्त नियम को समझाइए।
Ans. बाएँ हाथ के अंगूठे, तर्जनी और मध्यमा को परस्पर लंबवत फैलाएँ। तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र, मध्यमा विद्युत धारा और अंगूठा चालक पर लगने वाले बल या गति की दिशा बताता है।
Q. 13. विद्युत मोटर किस सिद्धांत पर कार्य करती है?
Ans. विद्युत मोटर इस सिद्धांत पर कार्य करती है कि चुंबकीय क्षेत्र में रखे विद्युत धारावाही चालक पर बल लगता है। इससे विद्युत ऊर्जा यांत्रिक ऊर्जा में बदलती है।
Q. 14. विद्युत मोटर में विभक्त वलय का क्या कार्य है?
Ans. विभक्त वलय प्रत्येक आधे चक्कर के बाद कुंडली में धारा की दिशा बदलता है, जिससे मोटर की कुंडली एक ही दिशा में घूमती रहती है।
Q. 15. विद्युत चुंबकीय प्रेरण क्या है?
Ans. जब किसी कुंडली से संबंधित चुंबकीय क्षेत्र में परिवर्तन होता है, तो कुंडली में प्रेरित विद्युत वाहक बल उत्पन्न होता है। परिपथ बंद होने पर प्रेरित धारा भी बह सकती है।
Q. 16. फ्लेमिंग के दक्षिणहस्त नियम का उपयोग क्या है?
Ans. फ्लेमिंग का दक्षिणहस्त नियम चुंबकीय क्षेत्र में गतिमान चालक में प्रेरित विद्युत धारा की दिशा ज्ञात करने के लिए उपयोग किया जाता है।
Q. 17. प्रत्यावर्ती धारा (AC) और दिष्ट धारा (DC) में क्या अंतर है?
Ans. प्रत्यावर्ती धारा समय के साथ अपनी दिशा बदलती है, जबकि दिष्ट धारा एक ही दिशा में प्रवाहित होती है।
Q. 18. घरेलू विद्युत परिपथ में फ्यूज का क्या कार्य है?
Ans. फ्यूज अधिक धारा प्रवाहित होने पर गर्म होकर पिघल जाता है और परिपथ को तोड़ देता है। इससे तारों और उपकरणों को क्षति से बचाने में सहायता मिलती है।
Q. 19. लघुपथन (Short Circuit) क्या है?
Ans. जब विद्युत परिपथ में सामान्यतः अलग रहने वाले कम विभवांतर वाले तार सीधे संपर्क में आ जाते हैं, तो प्रतिरोध बहुत कम हो सकता है और अत्यधिक धारा बह सकती है। इसे लघुपथन कहते हैं।
Q. 20. विद्युत परिपथ में अतिभारण (Overloading) क्या है?
Ans. जब किसी परिपथ से उसकी निर्धारित सुरक्षित क्षमता से अधिक विद्युत धारा प्रवाहित होती है, तो उसे अतिभारण कहते हैं। एक ही सॉकेट में कई अधिक शक्ति वाले उपकरण जोड़ना इसका कारण हो सकता है।