❓ Question Answer

Chapter 10 - खनिज एवं ऊर्जा संसाधन

Q. खनिज क्या हैं?
Ans. खनिज प्राकृतिक रूप से पाए जाने वाले समांगी पदार्थ हैं जिनकी एक निश्चित आंतरिक संरचना होती है। ये चट्टानों में विभिन्न रूपों में पाए जाते हैं।
Q. खनिज संसाधन हमारे लिए क्यों महत्वपूर्ण हैं?
Ans. खनिज उद्योग, निर्माण, परिवहन, मशीनों, बिजली उत्पादन और अनेक दैनिक उपयोग की वस्तुओं के निर्माण के लिए आवश्यक कच्चा माल उपलब्ध कराते हैं।
Q. खनिजों का वर्गीकरण किस प्रकार किया जाता है?
Ans. खनिजों को सामान्यतः धात्विक, अधात्विक और ऊर्जा खनिजों में वर्गीकृत किया जाता है।
Q. धात्विक खनिज क्या हैं? उदाहरण दीजिए।
Ans. वे खनिज जिनसे धातुएँ प्राप्त की जाती हैं, धात्विक खनिज कहलाते हैं। लौह अयस्क, ताँबा, मैंगनीज और बॉक्साइट इसके उदाहरण हैं।
Q. लौह और अलौह खनिजों में क्या अंतर है?
Ans. लौह खनिजों में लोहा प्रमुख धातु के रूप में होता है, जैसे लौह अयस्क। अलौह खनिजों में लोहा प्रमुख घटक नहीं होता, जैसे ताँबा और बॉक्साइट।
Q. लौह अयस्क का क्या महत्व है?
Ans. लौह अयस्क इस्पात उद्योग का प्रमुख कच्चा माल है। इस्पात का उपयोग मशीनों, भवनों, पुलों, रेल पटरियों और वाहनों के निर्माण में होता है।
Q. मैंगनीज का उपयोग किन कार्यों में होता है?
Ans. मैंगनीज का उपयोग मुख्यतः इस्पात के निर्माण और उसे मजबूत बनाने में किया जाता है। इसका उपयोग शुष्क बैटरियों तथा कुछ रासायनिक उद्योगों में भी होता है।
Q. बॉक्साइट किस धातु का प्रमुख अयस्क है?
Ans. बॉक्साइट एल्युमिनियम का प्रमुख अयस्क है। एल्युमिनियम हल्का, उपयोगी और विद्युत का अच्छा चालक होने के कारण अनेक उद्योगों में काम आता है।
Q. अभ्रक का क्या महत्व है?
Ans. अभ्रक में विद्युतरोधी गुण और ऊष्मा सहन करने की क्षमता होती है। इसका उपयोग विद्युत और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों सहित विभिन्न औद्योगिक कार्यों में किया जाता रहा है।
Q. खनन से पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
Ans. खनन से भूमि क्षरण, वनों की कटाई, धूल और जल प्रदूषण, भूजल स्तर में बदलाव तथा स्थानीय पारिस्थितिक तंत्रों को नुकसान हो सकता है।
Q. खनिज संरक्षण क्यों आवश्यक है?
Ans. खनिज सीमित और अधिकांशतः अनवीकरणीय संसाधन हैं। इनके निर्माण में लाखों वर्ष लग सकते हैं, इसलिए विवेकपूर्ण उपयोग, पुनर्चक्रण और अपव्यय रोकना आवश्यक है।
Q. ऊर्जा संसाधन क्या हैं?
Ans. ऊर्जा संसाधन वे स्रोत हैं जिनसे बिजली, ऊष्मा, प्रकाश और यांत्रिक कार्य के लिए ऊर्जा प्राप्त होती है। कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस, सूर्य और पवन इसके उदाहरण हैं।
Q. परंपरागत ऊर्जा संसाधन कौन-से हैं?
Ans. कोयला, पेट्रोलियम, प्राकृतिक गैस और जलविद्युत परंपरागत ऊर्जा संसाधनों के प्रमुख उदाहरण हैं। इनका उपयोग लंबे समय से किया जाता रहा है।
Q. गैर-परंपरागत ऊर्जा संसाधनों के उदाहरण दीजिए।
Ans. सौर ऊर्जा, पवन ऊर्जा, ज्वारीय ऊर्जा, भू-तापीय ऊर्जा और बायोगैस गैर-परंपरागत ऊर्जा संसाधनों के उदाहरण हैं।
Q. कोयला भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
Ans. कोयला ताप विद्युत उत्पादन और अनेक उद्योगों के लिए प्रमुख ईंधन है। इसका उपयोग इस्पात उद्योग में कोक बनाने के लिए भी किया जाता है।
Q. पेट्रोलियम का क्या महत्व है?
Ans. पेट्रोलियम से पेट्रोल, डीजल, केरोसिन और अनेक पेट्रोकेमिकल उत्पाद प्राप्त होते हैं। यह परिवहन, उद्योग और रासायनिक उत्पादों के निर्माण में महत्वपूर्ण है।
Q. प्राकृतिक गैस को उपयोगी ऊर्जा संसाधन क्यों माना जाता है?
Ans. प्राकृतिक गैस का उपयोग बिजली उत्पादन, उर्वरक निर्माण, घरेलू ईंधन और उद्योगों में किया जाता है। समान ऊर्जा उत्पादन के लिए यह सामान्यतः कोयले की तुलना में कम वायु प्रदूषण करती है।
Q. सौर ऊर्जा के दो लाभ बताइए।
Ans. सौर ऊर्जा नवीकरणीय है और इसके उपयोग के दौरान बिजली उत्पादन स्थल पर ईंधन जलाने की आवश्यकता नहीं होती। यह दूरस्थ क्षेत्रों में भी उपयोगी हो सकती है।
Q. पवन ऊर्जा कैसे प्राप्त की जाती है?
Ans. पवन ऊर्जा में हवा की गतिज ऊर्जा से पवन टर्बाइनों को घुमाया जाता है, जो जनरेटर की सहायता से विद्युत ऊर्जा उत्पन्न करते हैं।
Q. ऊर्जा संसाधनों के संरक्षण के उपाय बताइए।
Ans. ऊर्जा-कुशल उपकरणों का उपयोग, सार्वजनिक परिवहन अपनाना, बिजली की बर्बादी रोकना, सौर और पवन ऊर्जा को बढ़ावा देना तथा ईंधन का विवेकपूर्ण उपयोग ऊर्जा संरक्षण के प्रमुख उपाय हैं।

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