❓ Question Answer

Chapter 16 - लैंगिकता, धर्म और जाति

Q. लैंगिक विभाजन क्या है?
Ans. जब समाज में स्त्री और पुरुष के बीच सामाजिक भूमिकाओं, अवसरों, अधिकारों या जिम्मेदारियों का बँटवारा किया जाता है, तो इसे लैंगिक विभाजन कहा जाता है।
Q. लैंगिक असमानता का क्या अर्थ है?
Ans. जब महिलाओं और पुरुषों को समान अवसर, अधिकार, संसाधन या सम्मान नहीं मिलता, तो इसे लैंगिक असमानता कहते हैं।
Q. नारीवादी आंदोलन क्या है?
Ans. नारीवादी आंदोलन महिलाओं और पुरुषों के बीच समान अधिकार, अवसर और सम्मान सुनिश्चित करने के लिए चलाए जाने वाले सामाजिक और राजनीतिक आंदोलनों को कहते हैं।
Q. महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी क्यों आवश्यक है?
Ans. महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी से निर्णय प्रक्रिया में उनके हितों और समस्याओं को उचित स्थान मिलता है तथा लोकतंत्र अधिक प्रतिनिधिमूलक बनता है।
Q. भारत में महिलाओं के सामने आने वाली प्रमुख असमानताएँ कौन-सी हैं?
Ans. महिलाओं को कई क्षेत्रों में शिक्षा, रोजगार, वेतन, संपत्ति, घरेलू जिम्मेदारियों और राजनीतिक प्रतिनिधित्व से संबंधित असमानताओं का सामना करना पड़ सकता है।
Q. समान कार्य के लिए समान वेतन का क्या अर्थ है?
Ans. समान या समान मूल्य के कार्य के लिए बिना लैंगिक भेदभाव के उचित और समान पारिश्रमिक देना समान वेतन के सिद्धांत का उद्देश्य है।
Q. धर्मनिरपेक्ष राज्य किसे कहते हैं?
Ans. धर्मनिरपेक्ष राज्य वह है जो किसी एक धर्म को अपना आधिकारिक धर्म नहीं बनाता और सभी धर्मों के लोगों को समान नागरिक अधिकार प्रदान करता है।
Q. भारतीय संविधान धार्मिक स्वतंत्रता की रक्षा कैसे करता है?
Ans. भारतीय संविधान धार्मिक स्वतंत्रता और अंतःकरण की स्वतंत्रता प्रदान करता है। नागरिक कानून के अधीन अपने धर्म को मानने, उसका पालन करने और प्रचार करने का अधिकार रखते हैं।
Q. सांप्रदायिकता क्या है?
Ans. जब किसी धर्म को राजनीति का मुख्य आधार बनाकर एक धार्मिक समुदाय के हितों को दूसरे समुदायों के विरुद्ध प्रस्तुत किया जाता है, तो इसे सांप्रदायिकता कहते हैं।
Q. सांप्रदायिक राजनीति का एक रूप बताइए।
Ans. सांप्रदायिक राजनीति का एक रूप किसी धर्म के अनुयायियों को एक समान राजनीतिक समुदाय मानना और अन्य धार्मिक समुदायों के विरुद्ध अविश्वास या शत्रुता फैलाना है।
Q. सांप्रदायिकता लोकतंत्र के लिए हानिकारक क्यों है?
Ans. सांप्रदायिकता धार्मिक समुदायों के बीच तनाव, भेदभाव और हिंसा बढ़ा सकती है। इससे समान नागरिकता, सामाजिक सद्भाव और लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुँचता है।
Q. जाति व्यवस्था क्या है?
Ans. जाति व्यवस्था सामाजिक संगठन का ऐसा ऐतिहासिक रूप है जिसमें लोगों की सामाजिक स्थिति और पारंपरिक व्यवसाय कई बार जन्म के आधार पर निर्धारित किए जाते थे।
Q. जातिगत असमानता का क्या अर्थ है?
Ans. जब जाति के आधार पर किसी व्यक्ति या समूह को शिक्षा, रोजगार, संसाधनों, सम्मान या अधिकारों में कम अवसर दिए जाते हैं, तो इसे जातिगत असमानता कहते हैं।
Q. जाति आधारित भेदभाव को रोकने के लिए संविधान क्या करता है?
Ans. भारतीय संविधान समानता का अधिकार देता है, अस्पृश्यता को समाप्त करता है और जाति के आधार पर भेदभाव को प्रतिबंधित करता है।
Q. जाति और राजनीति के बीच क्या संबंध है?
Ans. जाति राजनीतिक उम्मीदवारों के चयन, मतदाताओं की प्राथमिकताओं और प्रतिनिधित्व को प्रभावित कर सकती है। वहीं राजनीति भी जातिगत समूहों की माँगों और सामाजिक संबंधों को प्रभावित करती है।
Q. क्या केवल जाति के आधार पर चुनाव जीता जा सकता है?
Ans. नहीं। मतदाता उम्मीदवार की योग्यता, पार्टी, नीतियों, कामकाज और स्थानीय मुद्दों सहित अनेक बातों पर विचार करते हैं। कोई भी जाति किसी क्षेत्र में सभी मतदाताओं का समर्थन सुनिश्चित नहीं करती।
Q. महिलाओं के लिए राजनीतिक प्रतिनिधित्व क्यों महत्वपूर्ण है?
Ans. राजनीतिक प्रतिनिधित्व से महिलाओं की आवश्यकताओं, अधिकारों और अनुभवों को कानून निर्माण तथा सरकारी नीतियों में बेहतर स्थान मिल सकता है।
Q. धर्म और राजनीति का संबंध लोकतंत्र में कैसा होना चाहिए?
Ans. धर्म से जुड़े नैतिक मूल्य सार्वजनिक जीवन को प्रभावित कर सकते हैं, लेकिन राजनीति में सभी धर्मों के प्रति समान सम्मान, नागरिक समानता और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा आवश्यक है।
Q. जातिगत भेदभाव कम करने के उपाय बताइए।
Ans. समान शिक्षा, कानून का प्रभावी पालन, सामाजिक जागरूकता, रोजगार के समान अवसर, भेदभाव के विरुद्ध कार्रवाई और विभिन्न समुदायों के बीच सहयोग से जातिगत भेदभाव कम किया जा सकता है।
Q. लैंगिक समानता, धार्मिक स्वतंत्रता और जातिगत समानता लोकतंत्र के लिए क्यों जरूरी हैं?
Ans. ये समान नागरिकता, मानवीय गरिमा, न्याय और राजनीतिक भागीदारी सुनिश्चित करते हैं। इनके बिना लोकतंत्र में सभी नागरिकों को समान अवसर और सम्मान नहीं मिल सकता।

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