❓ Question Answer

Chapter 21 - भारतीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्रक

Q. भारतीय अर्थव्यवस्था के क्षेत्रक से क्या अभिप्राय है?
Ans. आर्थिक गतिविधियों को उनके कार्यों और प्रकृति के आधार पर अलग-अलग समूहों में बाँटा जाता है। इन समूहों को अर्थव्यवस्था के क्षेत्रक कहते हैं।
Q. अर्थव्यवस्था के तीन प्रमुख क्षेत्रक कौन-से हैं?
Ans. अर्थव्यवस्था के तीन प्रमुख क्षेत्रक प्राथमिक क्षेत्रक, द्वितीयक क्षेत्रक और तृतीयक क्षेत्रक हैं।
Q. प्राथमिक क्षेत्रक क्या है?
Ans. प्राथमिक क्षेत्रक में वे गतिविधियाँ आती हैं जिनमें प्राकृतिक संसाधनों से सीधे वस्तुएँ प्राप्त की जाती हैं, जैसे कृषि, पशुपालन, मछली पालन, वानिकी और खनन।
Q. द्वितीयक क्षेत्रक क्या है?
Ans. द्वितीयक क्षेत्रक में कच्चे माल को प्रसंस्कृत करके उपयोगी वस्तुओं में बदलने वाली गतिविधियाँ आती हैं, जैसे कपड़ा निर्माण, चीनी उद्योग और इस्पात उत्पादन।
Q. तृतीयक क्षेत्रक क्या है?
Ans. तृतीयक क्षेत्रक में सेवाएँ प्रदान करने वाली गतिविधियाँ आती हैं, जैसे बैंकिंग, परिवहन, संचार, शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार।
Q. प्राथमिक क्षेत्रक को कृषि एवं संबंधित क्षेत्रक क्यों कहा जाता है?
Ans. क्योंकि इसमें कृषि तथा प्राकृतिक संसाधनों से सीधे जुड़ी गतिविधियाँ शामिल होती हैं, जैसे पशुपालन, मछली पालन और वानिकी।
Q. प्राथमिक और द्वितीयक क्षेत्रक में क्या अंतर है?
Ans. प्राथमिक क्षेत्रक प्राकृतिक संसाधनों से सीधे वस्तुएँ प्राप्त करता है, जबकि द्वितीयक क्षेत्रक कच्चे माल को संसाधित करके नए उत्पाद बनाता है।
Q. तृतीयक क्षेत्रक का महत्व क्यों बढ़ रहा है?
Ans. शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, संचार, बैंकिंग और सूचना प्रौद्योगिकी जैसी सेवाओं की बढ़ती माँग के कारण तृतीयक क्षेत्रक का महत्व बढ़ रहा है।
Q. सकल घरेलू उत्पाद (GDP) क्या है?
Ans. सकल घरेलू उत्पाद किसी निश्चित अवधि, सामान्यतः एक वर्ष, में देश की सीमाओं के भीतर उत्पादित सभी अंतिम वस्तुओं और सेवाओं के मौद्रिक मूल्य का योग है।
Q. GDP की गणना में अंतिम वस्तुओं का मूल्य क्यों लिया जाता है?
Ans. दोहरी गणना से बचने के लिए अंतिम वस्तुओं और सेवाओं का मूल्य लिया जाता है। मध्यवर्ती वस्तुओं का मूल्य अलग से जोड़ने पर एक ही उत्पादन का मूल्य दो बार गिना जा सकता है।
Q. संगठित क्षेत्रक क्या है?
Ans. संगठित क्षेत्रक में वे प्रतिष्ठान शामिल होते हैं जो निर्धारित सरकारी नियमों और विनियमों के अधीन पंजीकृत होते हैं तथा सामान्यतः कर्मचारियों को नियमित सेवा शर्तें और कानूनी लाभ प्रदान करते हैं।
Q. असंगठित क्षेत्रक क्या है?
Ans. असंगठित क्षेत्रक में छोटी इकाइयाँ और ऐसे रोजगार शामिल हो सकते हैं जहाँ नियमित सेवा शर्तों, सामाजिक सुरक्षा और कानूनी लाभों का पर्याप्त अभाव होता है।
Q. संगठित और असंगठित क्षेत्रक में एक अंतर बताइए।
Ans. संगठित क्षेत्रक में सामान्यतः नियमित वेतन, निर्धारित कार्य समय और कानूनी लाभों की बेहतर व्यवस्था होती है, जबकि असंगठित क्षेत्रक में रोजगार और आय अधिक अनिश्चित हो सकते हैं।
Q. सार्वजनिक क्षेत्रक क्या है?
Ans. सार्वजनिक क्षेत्रक में वे आर्थिक गतिविधियाँ और संस्थाएँ आती हैं जिनका स्वामित्व या नियंत्रण सरकार के पास होता है, जैसे सरकारी विद्यालय और सरकारी अस्पताल।
Q. निजी क्षेत्रक क्या है?
Ans. निजी क्षेत्रक में वे आर्थिक गतिविधियाँ और संस्थाएँ आती हैं जिनका स्वामित्व या संचालन निजी व्यक्तियों अथवा कंपनियों के पास होता है।
Q. सार्वजनिक क्षेत्रक की आवश्यकता क्यों है?
Ans. सार्वजनिक क्षेत्रक आवश्यक सेवाएँ उपलब्ध कराने, आधारभूत संरचना विकसित करने, सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देने और उन क्षेत्रों में सेवाएँ देने में महत्वपूर्ण है जहाँ निजी निवेश पर्याप्त नहीं होता।
Q. प्रच्छन्न बेरोजगारी क्या है?
Ans. प्रच्छन्न बेरोजगारी वह स्थिति है जिसमें किसी काम में आवश्यकता से अधिक लोग लगे होते हैं और कुछ लोगों को हटाने पर भी कुल उत्पादन में उल्लेखनीय कमी नहीं आती।
Q. मनरेगा का प्रमुख उद्देश्य क्या है?
Ans. महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम का उद्देश्य ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्यों को अकुशल शारीरिक काम करने की इच्छा होने पर निर्धारित शर्तों के अनुसार एक वित्तीय वर्ष में कम-से-कम 100 दिनों के मजदूरी रोजगार की कानूनी गारंटी प्रदान करना है।
Q. सेवा क्षेत्रक में रोजगार बढ़ाने के दो उपाय बताइए।
Ans. शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार तथा परिवहन, संचार, पर्यटन और सूचना प्रौद्योगिकी जैसी सेवाओं में निवेश बढ़ाना रोजगार के अवसर पैदा कर सकता है।
Q. भारतीय अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रकों का विकास क्यों आवश्यक है?
Ans. प्राथमिक क्षेत्रक कच्चा माल और खाद्य पदार्थ उपलब्ध कराता है, द्वितीयक क्षेत्रक वस्तुओं का निर्माण करता है और तृतीयक क्षेत्रक आवश्यक सेवाएँ देता है। इनका संतुलित विकास रोजगार, उत्पादन और जीवन स्तर में सुधार के लिए आवश्यक है।

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