Q. मुद्रा क्या है?
Ans. मुद्रा वह माध्यम है जिसका उपयोग वस्तुओं और सेवाओं के लेन-देन, भुगतान तथा मूल्य मापने के लिए किया जाता है।
Q. वस्तु विनिमय प्रणाली क्या है?
Ans. वस्तु विनिमय प्रणाली में वस्तुओं और सेवाओं का आदान-प्रदान बिना मुद्रा का उपयोग किए किया जाता है।
Q. वस्तु विनिमय प्रणाली की प्रमुख कठिनाई क्या है?
Ans. इस प्रणाली में आवश्यकताओं के दोहरे संयोग की आवश्यकता होती है, अर्थात दोनों व्यक्तियों को एक-दूसरे की वस्तु की जरूरत होनी चाहिए।
Q. आवश्यकताओं का दोहरा संयोग क्या है?
Ans. जब दो व्यक्ति एक-दूसरे की वस्तु या सेवा को चाहते हों और आपस में उसका आदान-प्रदान कर सकें, तो इसे आवश्यकताओं का दोहरा संयोग कहते हैं।
Q. मुद्रा ने वस्तु विनिमय की समस्या को कैसे दूर किया?
Ans. मुद्रा विनिमय के सामान्य माध्यम के रूप में कार्य करती है। इससे व्यक्ति अपनी वस्तु बेचकर मुद्रा प्राप्त कर सकता है और उस मुद्रा से अपनी जरूरत की दूसरी वस्तु खरीद सकता है।
Q. मुद्रा के प्रमुख कार्य कौन-कौन से हैं?
Ans. मुद्रा विनिमय का माध्यम है, वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य को व्यक्त करती है तथा भुगतान और बचत को सुविधाजनक बनाती है।
Q. आधुनिक मुद्रा के प्रमुख रूप कौन-से हैं?
Ans. आधुनिक मुद्रा के प्रमुख रूपों में कागजी नोट, सिक्के और बैंक खातों में जमा वह धन शामिल है जिसका उपयोग भुगतान के लिए किया जा सकता है।
Q. बैंक जमा क्या है?
Ans. बैंक जमा वह धन है जिसे ग्राहक बैंक खाते में रखते हैं। खाताधारक नियमों के अनुसार इसे निकाल सकते हैं या भुगतान के लिए इस्तेमाल कर सकते हैं।
Q. माँग जमा क्या है?
Ans. माँग जमा बैंक में रखा ऐसा धन है जिसे खाताधारक बैंक की शर्तों और नियमों के अनुसार माँगने पर निकाल सकता है।
Q. चेक क्या है?
Ans. चेक बैंक को दिया गया एक लिखित आदेश है जिसके माध्यम से खाताधारक अपने खाते से निर्धारित राशि किसी व्यक्ति या संस्था को भुगतान करने का निर्देश देता है।
Q. बैंक जमा का उपयोग भुगतान में कैसे होता है?
Ans. बैंक जमा का उपयोग चेक, बैंक हस्तांतरण, कार्ड और डिजिटल भुगतान के माध्यम से किया जा सकता है। इससे हर लेन-देन में नकद धन देना आवश्यक नहीं रहता।
Q. साख या ऋण क्या है?
Ans. साख या ऋण वह व्यवस्था है जिसमें कोई व्यक्ति या संस्था वर्तमान में धन या संसाधन प्राप्त करती है और सहमत शर्तों के अनुसार भविष्य में उसे लौटाने का वादा करती है।
Q. ऋण की शर्तें क्या होती हैं?
Ans. ऋण की शर्तों में ब्याज दर, जमानत, आवश्यक दस्तावेज, भुगतान की अवधि, किस्तें और ऋण चुकाने से संबंधित नियम शामिल हो सकते हैं।
Q. जमानत या संपार्श्विक क्या है?
Ans. जमानत या संपार्श्विक वह संपत्ति है जिसे ऋण लेने वाला व्यक्ति ऋणदाता के पास सुरक्षा के रूप में रखता है। ऋण न चुकाने की स्थिति में ऋणदाता को कानून और अनुबंध के अनुसार उस संपत्ति पर अधिकार मिल सकता है।
Q. औपचारिक ऋण स्रोत कौन-से हैं?
Ans. बैंक और सहकारी समितियाँ औपचारिक ऋण स्रोतों के प्रमुख उदाहरण हैं। ये सामान्यतः निर्धारित नियमों और नियामकीय व्यवस्था के अंतर्गत कार्य करते हैं।
Q. अनौपचारिक ऋण स्रोत कौन-से हैं?
Ans. साहूकार, व्यापारी, नियोक्ता, मित्र और रिश्तेदार अनौपचारिक ऋण स्रोतों के उदाहरण हैं। इनकी शर्तें अलग-अलग हो सकती हैं।
Q. औपचारिक ऋण स्रोतों का महत्व क्या है?
Ans. औपचारिक ऋण स्रोत नियामकीय निगरानी के अंतर्गत ऋण उपलब्ध कराते हैं और उचित शर्तों पर ऋण मिलने से उधारकर्ताओं को अनौपचारिक ऋण पर अत्यधिक निर्भरता कम करने में मदद मिल सकती है।
Q. स्वयं सहायता समूह (SHG) क्या है?
Ans. स्वयं सहायता समूह सामान्यतः समान सामाजिक या आर्थिक परिस्थितियों वाले लोगों का समूह होता है, जिसके सदस्य नियमित बचत करते हैं और समूह के नियमों के अनुसार जरूरतमंद सदस्यों को ऋण उपलब्ध करा सकते हैं।
Q. ऋण की अनुकूल और प्रतिकूल स्थितियाँ क्या हैं?
Ans. यदि ऋण से आय बढ़ती है और उधारकर्ता समय पर भुगतान कर पाता है, तो ऋण लाभदायक हो सकता है। यदि आय पर्याप्त न हो और ऋण चुकाना कठिन हो जाए, तो कर्ज का बोझ बढ़ सकता है।
Q. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ऋण व्यवस्था में क्या भूमिका है?
Ans. भारतीय रिजर्व बैंक भारत में बैंकों और मौद्रिक व्यवस्था का नियमन करता है। यह बैंकों के कामकाज की निगरानी करता है और बैंकिंग व्यवस्था में नियमों के पालन को सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।