Q. भूमंडलीकरण क्या है?
Ans. भूमंडलीकरण वह प्रक्रिया है जिसके द्वारा विभिन्न देशों की अर्थव्यवस्थाएँ व्यापार, निवेश, तकनीक और सेवाओं के माध्यम से एक-दूसरे से जुड़ती हैं।
Q. बहुराष्ट्रीय कंपनी (MNC) किसे कहते हैं?
Ans. ऐसी कंपनी जो एक से अधिक देशों में उत्पादन करती है या उत्पादन पर नियंत्रण रखती है, बहुराष्ट्रीय कंपनी कहलाती है।
Q. बहुराष्ट्रीय कंपनियाँ दूसरे देशों में उत्पादन क्यों करती हैं?
Ans. वे सस्ते श्रम, कच्चे माल, बड़े बाजार, बेहतर संसाधनों और उत्पादन लागत कम करने के अवसरों के कारण दूसरे देशों में उत्पादन करती हैं।
Q. विदेशी निवेश क्या है?
Ans. जब कोई कंपनी किसी दूसरे देश में उत्पादन, व्यवसाय या संपत्ति स्थापित करने के लिए धन निवेश करती है, तो इसे विदेशी निवेश कहते हैं।
Q. विदेशी व्यापार क्या है?
Ans. जब एक देश दूसरे देशों से वस्तुओं और सेवाओं का आयात या निर्यात करता है, तो इसे विदेशी व्यापार कहते हैं।
Q. विदेशी व्यापार बाजारों को कैसे जोड़ता है?
Ans. विदेशी व्यापार से एक देश के उत्पाद दूसरे देशों में पहुँचते हैं। इससे उपभोक्ताओं को अधिक विकल्प मिलते हैं और विभिन्न देशों के बाजार एक-दूसरे से जुड़ते हैं।
Q. विदेशी निवेश और विदेशी व्यापार में क्या अंतर है?
Ans. विदेशी निवेश में दूसरे देश में व्यवसाय या उत्पादन के लिए पूँजी लगाई जाती है, जबकि विदेशी व्यापार में देशों के बीच वस्तुओं और सेवाओं का आयात-निर्यात होता है।
Q. भूमंडलीकरण को बढ़ावा देने वाले प्रमुख कारक कौन-से हैं?
Ans. परिवहन और संचार तकनीक में सुधार, व्यापार उदारीकरण, विदेशी निवेश और बहुराष्ट्रीय कंपनियों का विस्तार भूमंडलीकरण को बढ़ावा देते हैं।
Q. सूचना एवं संचार तकनीक ने भूमंडलीकरण को कैसे बढ़ावा दिया?
Ans. इंटरनेट, मोबाइल, कंप्यूटर और डिजिटल संचार से सूचनाओं का आदान-प्रदान तेज हुआ है। इससे कंपनियाँ विभिन्न देशों में उत्पादन और व्यापार का बेहतर समन्वय कर पाती हैं।
Q. व्यापार अवरोध क्या हैं?
Ans. सरकार द्वारा विदेशी व्यापार को नियंत्रित करने के लिए लगाए गए प्रतिबंध, जैसे आयात शुल्क और आयात की मात्रात्मक सीमाएँ, व्यापार अवरोध कहलाते हैं।
Q. व्यापार उदारीकरण क्या है?
Ans. व्यापार उदारीकरण वह प्रक्रिया है जिसमें विदेशी व्यापार और निवेश पर लगे अनावश्यक सरकारी प्रतिबंधों को कम या हटाया जाता है।
Q. भारत में आर्थिक उदारीकरण की प्रक्रिया कब प्रमुख रूप से शुरू हुई?
Ans. भारत में आर्थिक उदारीकरण की प्रक्रिया 1991 में प्रमुख रूप से शुरू हुई, जब व्यापार और निवेश संबंधी कई प्रतिबंधों में बदलाव किए गए।
Q. विश्व व्यापार संगठन (WTO) का प्रमुख उद्देश्य क्या है?
Ans. विश्व व्यापार संगठन का उद्देश्य देशों के बीच व्यापार के नियमों के लिए एक अंतरराष्ट्रीय ढाँचा उपलब्ध कराना और व्यापार संबंधी वार्ताओं तथा विवादों के समाधान में सहायता करना है।
Q. भूमंडलीकरण से उपभोक्ताओं को क्या लाभ हुआ है?
Ans. उपभोक्ताओं को अनेक वस्तुओं और सेवाओं के विकल्प, बेहतर गुणवत्ता वाले उत्पाद और कुछ क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धा के कारण अधिक प्रतिस्पर्धी कीमतें मिल सकती हैं।
Q. भूमंडलीकरण से भारतीय उत्पादकों को क्या अवसर मिले हैं?
Ans. भारतीय उत्पादकों को बड़े अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुँच, विदेशी निवेश, नई तकनीक और अन्य कंपनियों के साथ व्यापार करने के अवसर मिले हैं।
Q. भूमंडलीकरण का छोटे उत्पादकों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है?
Ans. छोटे उत्पादकों को बड़ी कंपनियों से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ सकता है। अधिक लागत और सीमित संसाधनों के कारण कुछ उत्पादकों के लिए बाजार में टिके रहना कठिन हो सकता है।
Q. भूमंडलीकरण का श्रमिकों पर क्या प्रभाव पड़ता है?
Ans. कुछ क्षेत्रों में नए रोजगार और कौशल विकास के अवसर पैदा होते हैं, जबकि अन्य क्षेत्रों में कम वेतन, अस्थायी रोजगार और काम की असुरक्षा जैसी समस्याएँ भी हो सकती हैं।
Q. भूमंडलीकरण के लाभ सभी लोगों को समान रूप से क्यों नहीं मिलते?
Ans. लोगों और कंपनियों के पास शिक्षा, पूँजी, तकनीक और बाजार तक पहुँच के संसाधन अलग-अलग होते हैं। इसलिए कुछ कंपनियाँ और श्रमिक अधिक लाभ उठाते हैं, जबकि अन्य पीछे रह सकते हैं।
Q. न्यायसंगत भूमंडलीकरण से क्या अभिप्राय है?
Ans. न्यायसंगत भूमंडलीकरण ऐसी प्रक्रिया है जिसमें विकास के लाभ अधिक व्यापक रूप से लोगों तक पहुँचें, श्रमिकों के अधिकार सुरक्षित रहें और छोटे उत्पादकों को उचित अवसर मिलें।
Q. भूमंडलीकरण को अधिक न्यायसंगत बनाने में सरकार की क्या भूमिका है?
Ans. सरकार श्रमिकों के अधिकारों की रक्षा, शिक्षा और कौशल प्रशिक्षण, छोटे उत्पादकों को सहायता, उचित नियमों का पालन तथा कमजोर वर्गों के लिए अवसर बढ़ाकर भूमंडलीकरण को अधिक न्यायसंगत बना सकती है।