Q. संख्या पद्धति क्या है?
Ans. संख्याओं को विभिन्न समूहों में वर्गीकृत करने और व्यक्त करने की विधि संख्या पद्धति कहलाती है।
Q. प्राकृतिक संख्याएँ क्या हैं?
Ans. गिनती की संख्याएँ जैसे 1, 2, 3, 4 आदि प्राकृतिक संख्याएँ हैं।
Q. पूर्ण संख्याएँ क्या हैं?
Ans. शून्य तथा सभी प्राकृतिक संख्याएँ मिलकर पूर्ण संख्याएँ कहलाती हैं। जैसे 0, 1, 2, 3 आदि।
Q. पूर्णांक क्या हैं?
Ans. धनात्मक पूर्ण संख्याएँ, ऋणात्मक पूर्ण संख्याएँ और शून्य मिलकर पूर्णांक कहलाते हैं।
Q. परिमेय संख्या क्या है?
Ans. जिस संख्या को p/q के रूप में लिखा जा सके, जहाँ p और q पूर्णांक हों तथा q शून्य न हो, वह परिमेय संख्या है।
Q. अपरिमेय संख्या क्या है?
Ans. जिस संख्या को दो पूर्णांकों के अनुपात p/q के रूप में नहीं लिखा जा सकता, वह अपरिमेय संख्या है।
Q. वास्तविक संख्याएँ क्या हैं?
Ans. परिमेय और अपरिमेय संख्याओं के समूह को वास्तविक संख्याएँ कहते हैं।
Q. क्या प्रत्येक पूर्णांक परिमेय संख्या है?
Ans. हाँ, प्रत्येक पूर्णांक n को n/1 के रूप में लिखा जा सकता है। इसलिए प्रत्येक पूर्णांक परिमेय है।
Q. क्या प्रत्येक परिमेय संख्या पूर्णांक होती है?
Ans. नहीं, जैसे 1/2 एक परिमेय संख्या है, लेकिन पूर्णांक नहीं है।
Q. 1/4 का दशमलव प्रसार क्या है?
Ans. 1/4 = 0.25। यह एक सांत दशमलव प्रसार है।
Q. 1/3 का दशमलव प्रसार क्या है?
Ans. 1/3 = 0.333...। यह अनवसानी आवर्ती दशमलव है।
Q. किस प्रकार की परिमेय संख्या का दशमलव प्रसार सांत होता है?
Ans. जब सरलतम रूप में हर के अभाज्य गुणनखंड केवल 2 या 5 हों, तब दशमलव प्रसार सांत होता है।
Q. दो अपरिमेय संख्याओं के उदाहरण दीजिए।
Ans. √2 और √3 अपरिमेय संख्याओं के उदाहरण हैं।
Q. क्या √49 परिमेय संख्या है?
Ans. हाँ, √49 = 7 है और 7 एक परिमेय संख्या है।
Q. 2³ का मान ज्ञात कीजिए।
Ans. 2³ = 2 × 2 × 2 = 8।
Q. घातांक के गुणन नियम को लिखिए।
Ans. समान आधार की घातों के गुणन में घातांक जुड़ते हैं: aᵐ × aⁿ = aᵐ⁺ⁿ।
Q. घातांक के भाग नियम को लिखिए।
Ans. समान अशून्य आधार की घातों के भाग में घातांक घटते हैं: aᵐ ÷ aⁿ = aᵐ⁻ⁿ।
Q. √2 × √2 का मान क्या है?
Ans. √2 × √2 = 2।
Q. √10 किन दो क्रमागत पूर्णांकों के बीच है?
Ans. √10, 3 और 4 के बीच है, क्योंकि 9 < 10 < 16।
Q. संख्या रेखा पर अपरिमेय संख्या कैसे दर्शाते हैं?
Ans. ज्यामितीय रचना द्वारा उस संख्या के बराबर लंबाई बनाकर संख्या रेखा पर शून्य से उचित दूरी पर बिंदु अंकित करते हैं।