❓ Question Answer

Chapter 3 - मुद्रा और साख

Q. मुद्रा क्या है?
Ans. मुद्रा वह माध्यम है जिसे सामान्यतः वस्तुओं और सेवाओं के भुगतान तथा लेन-देन के लिए स्वीकार किया जाता है।
Q. वस्तु-विनिमय प्रणाली क्या है?
Ans. जब वस्तुओं और सेवाओं का आदान-प्रदान मुद्रा का उपयोग किए बिना एक-दूसरे के बदले किया जाता है, तो इसे वस्तु-विनिमय प्रणाली कहते हैं।
Q. वस्तु-विनिमय प्रणाली की प्रमुख कठिनाई क्या थी?
Ans. इस प्रणाली में आवश्यकताओं का दोहरा संयोग होना जरूरी था, अर्थात दोनों पक्षों को एक-दूसरे की वस्तु की आवश्यकता होनी चाहिए थी।
Q. आवश्यकताओं का दोहरा संयोग क्या है?
Ans. जब वस्तु-विनिमय में दोनों पक्ष एक-दूसरे की वस्तु चाहते हों, तो इस स्थिति को आवश्यकताओं का दोहरा संयोग कहते हैं।
Q. मुद्रा ने वस्तु-विनिमय की समस्या को कैसे दूर किया?
Ans. मुद्रा ने विनिमय के सामान्य माध्यम के रूप में काम किया, जिससे व्यक्ति अपनी वस्तु बेचकर मुद्रा प्राप्त कर सकता है और उससे अपनी जरूरत की वस्तु खरीद सकता है।
Q. मुद्रा के प्रमुख कार्य कौन-कौन से हैं?
Ans. मुद्रा विनिमय का माध्यम है, वस्तुओं और सेवाओं के मूल्य को मापने का साधन है तथा मूल्य को संचित करने में मदद करती है।
Q. आधुनिक अर्थव्यवस्था में मुद्रा के कौन-कौन से रूप प्रचलित हैं?
Ans. आधुनिक अर्थव्यवस्था में कागजी नोट, सिक्के और बैंक जमा का उपयोग भुगतान तथा लेन-देन के लिए किया जाता है।
Q. मांग जमा क्या है?
Ans. बैंक में ऐसी जमा राशि जिसे खाताधारक की मांग पर निर्धारित बैंकिंग प्रक्रिया के अनुसार निकाला जा सकता है, मांग जमा कहलाती है।
Q. चेक क्या है?
Ans. चेक बैंक को दिया गया लिखित निर्देश है, जिसके माध्यम से खाताधारक अपने खाते से निर्धारित राशि किसी व्यक्ति या संस्था को देने के लिए बैंक से कहता है।
Q. बैंक जमा को मुद्रा का एक रूप क्यों माना जाता है?
Ans. क्योंकि बैंक जमा का उपयोग चेक, इलेक्ट्रॉनिक हस्तांतरण और अन्य बैंकिंग माध्यमों से भुगतान करने में किया जा सकता है।
Q. साख से क्या अभिप्राय है?
Ans. साख ऐसी व्यवस्था है जिसमें कोई व्यक्ति या संस्था भविष्य में राशि लौटाने की शर्त पर दूसरे व्यक्ति या संस्था से धन या संसाधन प्राप्त करती है।
Q. ऋण की शर्तें क्या होती हैं?
Ans. ऋण की शर्तों में ब्याज दर, जमानत, दस्तावेज, भुगतान की अवधि तथा ऋण चुकाने का तरीका शामिल हो सकता है।
Q. जमानत या संपार्श्विक क्या है?
Ans. ऋण लेने वाला व्यक्ति ऋणदाता को जो संपत्ति सुरक्षा के रूप में देता है, उसे जमानत या संपार्श्विक कहते हैं।
Q. ऋणदाता और ऋण लेने वाले में क्या अंतर है?
Ans. ऋणदाता वह व्यक्ति या संस्था है जो धन उधार देता है, जबकि ऋण लेने वाला वह व्यक्ति या संस्था है जो धन उधार प्राप्त करता है।
Q. औपचारिक ऋण स्रोत कौन-कौन से हैं?
Ans. बैंक और सहकारी समितियाँ औपचारिक ऋण स्रोतों के प्रमुख उदाहरण हैं।
Q. अनौपचारिक ऋण स्रोत क्या हैं?
Ans. साहूकार, व्यापारी, नियोक्ता, मित्र और रिश्तेदार अनौपचारिक ऋण स्रोतों के उदाहरण हैं।
Q. औपचारिक ऋण स्रोतों पर निगरानी कौन रखता है?
Ans. भारत में भारतीय रिजर्व बैंक बैंकों के कामकाज और ऋण संबंधी गतिविधियों की निगरानी करता है।
Q. स्वयं सहायता समूह (SHG) क्या है?
Ans. स्वयं सहायता समूह सामान्यतः समान आर्थिक और सामाजिक परिस्थितियों वाले लोगों का छोटा समूह होता है, जो नियमित बचत करता है और सदस्यों को जरूरत के अनुसार ऋण उपलब्ध कराने में मदद करता है।
Q. ग्रामीण क्षेत्रों में स्वयं सहायता समूहों का क्या महत्व है?
Ans. ये समूह विशेष रूप से महिलाओं को बचत की आदत विकसित करने, छोटे ऋण प्राप्त करने और साहूकारों पर निर्भरता कम करने में सहायता कर सकते हैं।
Q. सस्ता और सुलभ ऋण आर्थिक विकास में कैसे सहायक है?
Ans. सस्ता और सुलभ ऋण किसानों, छोटे व्यापारियों और उद्यमियों को उत्पादन बढ़ाने, रोजगार पैदा करने तथा आय में सुधार करने में सहायता कर सकता है।

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